रात हसीं वो बीत गई, ये दिन काला लौट आया है,
खून चूसने अश्क़ बहाने ये दिन साला लौट आया है.
अब सारा दिन खुद से खुद की जंग चलेगी
कभी ये मुझसे लड़ेगा, कभी मैं इससे हार जाउंगा,
फिर शाम ढलते- ढलते ये दिन भी निकल जाएगा.
लेकिन शुक्र है,
सबके हिस्से की तरह, मेरे हिस्से में भी एक रात आएगी,
हां, दिन अधूरा रहा है आज का लाजामी है
शूकून की नींद नहीं आयेगी. फिर बीती कल की रात की तरह
ये रात भी बस काली होकर गुजर जायेगी.
रात के साये में
चमकते हर छोटे- बड़े तारे में
जिंदगी की चमक तो दिखेगी
फिर दिन के निकलते सूरज में
उसकी तपन में, ज़िंदगी के ख्वाब सारे जलते भी नजर आयेंगे.
शाम की ढलती सूरज की किरणों में
ज़िंदगी थोड़ी लाल थोड़ी मटमैली हो जायेगी,
फिर हर शाम की तरह ये रात भी ज़िंदगी की तरह
बस काली होकर गुजर जाएगी.
रात हसीं वो बीत गई, ये दिन काला लौट आया है,
खून चूसने अश्क़ बहाने ये दिन साला लौट आया है.
अब सारा दिन खुद से खुद की जंग चलेगी
कभी ये मुझसे लड़ेगा, कभी मैं इससे हार जाउंगा,
फिर शाम ढलते- ढलते ये दिन भी निकल जाएगा.
लेकिन शुक्र है,
सबके हिस्से की तरह, मेरे हिस्से में भी एक रात आएगी,
हां, दिन अधूरा रहा है आज का लाजामी है
शूकून की नींद नहीं आयेगी. फिर बीती कल की रात की तरह
ये रात भी बस काली होकर गुजर जायेगी.
रात के साये में
चमकते हर छोटे- बड़े तारे में
जिंदगी की चमक तो दिखेगी
फिर दिन के निकलते सूरज में
उसकी तपन में, ज़िंदगी के ख्वाब सारे जलते भी नजर आयेंगे.
शाम की ढलती सूरज की किरणों में
ज़िंदगी थोड़ी लाल थोड़ी मटमैली हो जायेगी,
फिर हर शाम की तरह ये रात भी ज़िंदगी की तरह
बस काली होकर गुजर जाएगी.

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