Saturday, 12 August 2017

#shame_on_you_dear_humanity

मेट्रो नहीं चहिये साहब
स्टेडियम भी नहीं चाहिए
रोजगार भी अपने पास रख लो
ये आवास और ये झूठे विश्वास भी रखलो 
मेरा स्कूल का बस्ता और फट्टी किताबे भी ले लो
बस थोड़ी सी सांसे दे दो,
कल से दम घुटा जा रहा हैं
ऐसा लग रहा है, की किसी ने गले के ऊपर लाशो का बोझ रख दिया हो
ऐसा लग रहा है,, की किसी और के हिस्से की सांसे लिए जा रहा हूँ!
इतनी घुटन हो रही है की सांसे ऊपर चढ़ाई ही ना जा रही है,
हाथ कांप कर रहे सोचने में ही की बिना सांसो की ज़िन्दगी कैसे होती है अभी पल भर के लिए बिना सांसे के जीने की सोची, कसम से हो ही नहीं पाया !
फिर
कल उन बच्चों का क्या हुआ होगा?
जब नन्हे-नन्हे पैर उनके पलने में छटपटाये होगे,
कमाल है कुछ सुनाई ही नहीं दिया,
लेकिन सुनाई देगी,
साहब याद रखियेगा ये, हिसाब होगा ,
यहाँ नहीं तो ऊपर होगा, लेकिन इन सांसो का हिसाब तो देना होगा .
और हा साहब राम मंदिर, में भी जाके ये पाप नहीं धुलने वाले...

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