Thursday, 4 July 2019

बुरा हुआ...


बुरा हुआ बुरा हुआ, किसी के साथ बहुत बुरा हुआ, किसी के साथ बस बुरा हुआ

लेकिन प्यार हुआ, बस उसी को हुआ, होकर उसी तक रह गया

यकीन मानो, मेरा यकीन करो, फिरसे कह रहा हूं, इससे बुरा कुछ नहीं, इससे बुरा कुछ हो नहीं सकता, खुद सोचे इससे बुरा भी कुछ हो सकता है क्या!

Friday, 17 May 2019

किसी किरदार का अंत पूरी तरह नहीं होता...



किताब कभी नहीं चाहता कि उसका किरदार शुरू के पन्नों में मर जाए

लेकिन उसको पता है कि कहानी उस किरदार के चले जाने के बाद ही पूरी होगी।

इसलिए कभी किसी किताब, किसी किरदार का अंत पूरी तरह नहीं होता

बस कुछ दिन के लिए चीजो को छोड़ दिया जाता है ताकि जो है उसे बचाया जा सके।

Monday, 6 May 2019

खर्च हो रहा हूं मैं...



3 बज चुके है, पता है आओगी नहीं
दूर- दूर तक कोई चराग-ए- उम्मीद भी नहीं है

इसलिए आज सोने से पहले, सो जाने पहले, तुमसे फिर से एक बार कह रहा हूं, मुझे संभाल लो।

मैं वक़्त के साथ हर लहर के साथ बहते रेत की तरह थोड़ा- थोड़ा करके खर्च हो रहा हूं।

ऐसा भी कुछ खास नहीं हुआ था उस दिन।

खुद को मनाओगी तो मुझे भी मना लोगी तुम, ये इतने यकीन से मैं नहीं हमारा प्यार कह रहा है।

अभी देरी हुई नहीं है, दूसरी लहर आने से पहले बची रेत को समेटा जा सकता है, एक कोशिश नाकाम ही सही, की जा सकती है।

और अगर देर भी हो गयी इन सब बातों में तो भी क्या फर्क पड़ता है।

कम से कम तुम खुद से कह तो पाओगी, की हां मैने एक कोशिश की थी।

Monday, 1 April 2019

भीड़ से अलग...




तुम भीड़ से अलग हो लिखो किसी तख्ती पर और सामने अपने तख्त के टांग दो दिवार पर कहीं, और देखो उसे सुबह शाम और दिलाओ खुद को यकीन की तुम हो सबसे अलग भीड़ से अलग उन सबसे अलग जो दूसरे के बनाए रास्ते पर चले जा रहे सीना ताने झोला हाथ में झुलाए. तुम साले अपना झोला कंधे पर लिए चलो अपने किनारे, उनसे अलग.

वो खुश दिखे तो चिढ़ाओ उन्हें अपनी भीड़ से अलग वाली तख्ती दिखाकर, और खुद थोड़ी दूर आगे चलकर अपने झोले में हाथ डालकर टटोलना खुद को और देखना कितना कुछ अलग लिए जा रहे हो, कितना कुछ लिये जा रहे हो.

Tuesday, 5 February 2019

वो उसदिन दूसरे झुमके का इंतजाम करके आई थी...




ऐसा कुछ खास नहीं हुआ था उस दिन, वो हमेशा की तरह पूरे एक घंटे की देरी से आई थी. उसदिन भी हमने एक दूसरे को आखरी बार की तरह गले लगाया था.

मेरे लबों से रहा नहीं गया तो हमेशा की तरह मेरे लबों ने उसके लबों को भिगाया था, कुछ खास नहीं कह सकते. उसका शर्माना आज भी पहले जैसा था.

आज भी हमेशा की तरह उसके झुमके दिन में ही चांद को चिढ़ा रहे थे. सूराज से कोई खास लेना देना होता नहीं था उन दिनों. वो अपनी रोशनी के साथ मस्त मगन रहा करता था.

बातें आज भी हमारी उसकी सहेली की बातों से शुरु हुई थी, फिर जब वो सब कह गयी, तब हमेशा की तरह मैने उसे अपने हाफ्ते भर का सरकारी कामकाज गिनाया था, खाने में आज जरुर कुछ फीकापन था, लेकिन इसमें कोई खास बात नहीं, इस मौसम में आलू का स्वाद मीठा ही होता है.

फिर वो शाम ढले घर चली गयी थी, उसके जाने के बाद मैं काफी देर वहीं बैठा रहा, उसके दिए एक झुमके को निहारता रहा और पार्क बंद करवा के घर आ गया था.

और अब मैं हर हफ्ते उसी पार्क में जाता हूं, साथ वो झुमका लिए, मुझे यकिन था, ये झुमका उसका फेवरेट है लेने आएगी, और एक कान अधूरा है उसका तो शयाद इस हफ्ते जल्दी आयेगी.

लेकिन आज इतने सालों बाद जब मैने उसके कानों में दूसरा झुमका देखा तो समझ आया कि, उसदिन
वो बाज़ार से अपने लिए दूसरे झुमके का इंतजाम करके आई थी, और उसदिन वो आलू की सब्जी और पराठे पास के दुकान से लाई थी.

Friday, 25 January 2019

काला चश्मा...

दूसरे देशों के लोग चांद पर बस चुके थे
यहां देश में लोग मंदिर- मस्जिद गाय- बकरी के नाम पर इंसान काट रहे थे.

                                                                          सबको पता था शुरुआत हम करेंगे तो यह रुक सकता है
                                                                          लेकिन सब धर्म नाम का काला चश्मा पहन तमाशा देखते रहे.

देश इस बार अपनो का गुलाम बन गया
सब गूंगे बहरो की तरह खुद पर राज करने लगे.

Thursday, 24 January 2019

गाय हिंदू थी सलीम चाचा मुसलमान...

सलीम चाचा के घर में दो गायें थी
रंग साफ, लीटर भर से ज्यादा दूध देने वाली.


                                                                  पूरे रामपुर में सलीम चाचा की दोनों बेटियों के भी चर्चे थे
                                                                  रंग साफ, किसी के भी दिल को भा जाने वाली.


एक दिन सलीम चाचा की एक गाय घर में मरी पाई गई
लोगों को शक था, गाय हिंदू थी और सलीम चाचा मुसलमान. खैर जान बच गई.
कुछ दिनों बाद सलीम चाचा ने अपनी इकलौती बेटी रेश्मा का निक़ाह कराकर दुनिया को अलविदा कह गए.

गुलाब...

उन्होंने कहा, पूरे अमीनाबाद के लड़के हमपर मरते हैं तुम मानो न मानो वो हमसे बे-पनाह मोहब्ब्त करते हैं और अगर दराख से झुमका भी दिखा दूं तो ...