कहनी लिखने वालो की अपनी कोई कहानी नहीं होती है ।
होती भी है तो बिलकुल आधी आधूरी , टूटी फूटी बिखरी सी ।
इसीलिए वो दूसरो की कहानियो अपनी कहानी तलाशते है।
और अपनी कहानी का कुछ हिस्सा सबकी कहानियो मे डालकर अपनी लिखी हुई कहानी को पूरा करने की कोशिस करते है
क्युकी आधूरी कहानी का दर्द
इनसे बेहतर कोई नही समझ सकता ।
इसीलिए एक अच्छा कहानीकार
पर पन्ने पर कहानी सुनने वालो को बताता चलता है ।
कहानी आगे भी जरी रहेगी,
ये कहानी आगे भी जरी रहेगी।
Tuesday, 3 January 2017
कहानीकार ।
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गुलाब...
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Well written 👍
ReplyDeleteThank you akshita
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