चलो देर से ही सही, मेरे
प्यार का इनाम तो आया ।
उन्हें सदियों जैसा चाहा हमने ,
बदले मे एक पल का सलाम तो आया
अब तह उम्र साथ रहेगा ,
ये दर्द तेरा
देखना मेरे साथ ही जायेगा
ये अधूरा इश्क मेरा
ऊपर से मिट्टी नहीं
बस गिराना आल्फ़ज मेरे
क्युकी नियत अब मिट्टी की नहीं बस
जज्बातों की रह गयी है।
की नियत अब तेरे प्यार की
नहीं बस तेरी आदतो की रह गयी है
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