Thursday, 2 August 2018

रेत का घर...



पहले मैं रेत को समेटना चाहता था
क्यूंकी मुझे ऐसा लगता था की रेत पर चलना बहुत ही आसान है, 
लेकिन मेरी यह गलतफ़हमी दो कदम चलने के बाद दूर हो गई.


                                                फ़िर मैं दरिया में तैरना चाहता था
                                                क्यूंकी मुझे मुझे ऐसा लगता था की दरिया में तैरना कोई मुश्किल काम नहीं, 
                                                लेकिन मेरी यह गलतफ़हमी भी दो लहरों के बाद दूर हो गई.


फ़िर एक दिन मैने कुछ नहीं किया
दरिया को रेत से और रेत को दरिया से मिल जाने दिया.
और आज मेरा रेत का एक घर है,
और ठीक मेरे घर के बगल से ही एक दरिया बहती है.

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