ये बात ना मीरा की साड़ी की है,
ये बात ना ही हीना के हिजाब के पहरेदारी की है,
और ना ही बात कम कपड़ों के किरदारी की है,
क्युकी ये बात जो है ,
वो है अदब और लिहाज़ की !
जो शुरू आंखो की नीयत और
ख़त्म सोच की रूहानी से है।
उन्होंने कहा, पूरे अमीनाबाद के लड़के हमपर मरते हैं तुम मानो न मानो वो हमसे बे-पनाह मोहब्ब्त करते हैं और अगर दराख से झुमका भी दिखा दूं तो ...
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