Wednesday, 5 July 2017

गाय माता...

क्या ऐसे क्या देख रहे हो ? पहले कभी नहीं देखे क्या हमका ? अरे हम गाय तुम्हारी अम्मा हैं। पहचान लो दुई सिंग है हमरे।
इंसान- अम्मा तनिको चिंता ना करो हम रक्षा करेगे तुम्हारी !
गाय - रहने दो , भैया दुई दिन से तुम्हरे दुवारी पर खड़ी है ,एक रोटी तो तुमसे दिया ना गया।
इंसान- अम्मा घर मे कुछ नहीं है खाने को । कहा जाऊं कमाने को ? कोई काम है तो बताइए ?

गाय- क्यू इतना अच्छा काम तो कर रहे ।मेरे लिए घर फूंक रहे । इंसानों को काट रहे? अच्छा खासा कमाते होगे तुम तो ?

इंसान- कुछ नहीं मिलता उससे ?

गाय- तो फिर इतनी मरा मारी क्यों मचा रखी है?

इंसान- ये लीजिए रोटी खाइए आप !

गाय -अरे लानत है ऐसी रोटी पर । भूकी मर जाऊं लेकिन तेरे घर की रोटी ना खाऊ

इंसान -अरे मैं ब्राह्मण हूं !

गाय- रोटी पर लिख के दिखाओ तुम क्या हो?

दो रोटी तुमसे दी ना जा रही कबसे हाय तौबा मचाएं हो। अरे कुछ कम धंधा करो। और तुम लोग अगर इतना उत्पात ना मचाए होते तो घांस फूस खा के इतनी सदियों से जी रहे हैं। तुम्हारे दो रोटी के  लिए तरस नहीं रहे हम ।
घर में पड़ी अम्मा को महीनो से खांसी की दवा ना पीला पा रहे हो चले हो हमको अम्मा बनाने !

नाम बदनाम करके रखे हो हमारा , गाय सुनते ही सब ऐसे भागते है जैसे भूत देख लिए हो। नीक नीक रहो भैया और हमको भी रहने दो। और हा जिसदिन किसी गाय नामक अम्मा को सड़क से उठा कर अपने घर  के आंगन में जगह दे पाना उसदिन लड़ जाना मेरे कटने पर ।

इंसान- अम्मा रोटी अब तो खा लो ।

गाय - भीतर जाओ अपनी  उस अम्मा को आधी रोटी खिलाओ तब हमको आधी दे देना!

और हा तुम कैमरा वाले भगो तो यहां से । दिनभर पकर पकर करते हो।
और खबरदार जो इस सबके लिए भी चर्चा कराए तो ।

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