Tuesday, 27 December 2016

तुम मे हम...

काश तुम मैं हम !
और
हम मैं तुम सिमाट जाते तो ये

दूरिया  ना होटी तेरे मेरे दारमियां

तब
कहानी भी एक  हमारी होती
ज़िसमे
राजा  मैं !
तू मेरी रानी होती !
एक छोटा सा सपनो का महल हमारा होता
खुशियो से भरी हर शाम होती ...
हर शाम मेरी तेरी जुल्फो के साये मैं गुजरती ....
हर शुबह तुझे मैं अपनी सांसो की गार्मी से जगाता ...
सारा दिन
पूरी शाम ..... हर रात
तुझमे हम जीते रहते ......
कोई नहीं होता तेरे मेरे बीच
बस तू होती ,बस तू ही  तू  होती
बस तू ही तो थी ,
कारवा ये हमारे प्यार का
चलता जाता ... बस चलता ही जाता
तेरे साथ बिताये हुए एक शाम मैं मेरी
एक रात वाली रात होती ......
अगर शयाद आज तू मेरे साथ होती

तो शायद अपनी कहानी भी कुछ ऐसी होती......

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