Thursday, 29 December 2016

जरा इतना तो बताओ ।

चलो तुम मुझको भूल जाओ
मैं तुमको भूल जाता हूँ ।

लेकिन जरा इतना तो बताओ ।

उन वादों का क्या करू ?
जो साथ रहने का किया था
एक दूसरे को हर बात के लिए माफ़ करदेने का किया था
जब जरुरत होगी तब साथ एक दुसरे का देने का किया था ।

उन बातों का क्या करू ?
तुमसे प्यार करते हैं
तुमपे ऐतबार करते हैं
तुमपे हा बस तुमपे जान निसार करते हैं।

उन रातो का क्या करू ?
जो तेरे यादों के सहारे कटी है
जो तेरे बारे मे सोचते हुए बीती है
तेरे ख्वाबो के साथ सजी है!

उन लम्हों का क्या करू ?
जो तेरे साथ बिताये है
जो तेरे इंतजार मे लुटाये है
जो तेरे लिए सजाये है !

उन सितारों का क्या करू?
जो तेरे लिए सजाये है
जो तेरी राहों मे बिछाए है
जो तेरी सौगात मे बदलो से चुराए है !

उन फरियादों का क्या करू ?
जो तेरे सजदे मे मांगे है
जो तेरे बुरे वक़्त के लिए बचाए है
जो खुदा से तेरे हिस्से के चुराए है !

उन इरादों का क्या करू ?
जो तुझे पाने को लाये है
जो तुझे पूरी दुनिया से जीतने को बनाये है
सबसे छिपा तुझे खुद का बनाने को पाए है।

उन जख्मों इअ क्या करू ?
जो तेरे लिए खाये है
जो तेरे हिस्से के थे पर मैंने खुदके लिए मांगे है
जो बाकी है उन्हें अपने हिस्से मे लिखवाए है ।

उन सांसो का क्या करू ?
जो तेरे लिए बचाए है
जो तेरे संग जीने को सँभालते आये है
जो तेरे हिस्से खुदा के घर कर आये है ।

उन सपनो का क्या करू  ?
जो हमने सजाये है
जिसमे हर बार तू रानी बस एक बार खुदको राजा बनाये है
जिसमे तेरे लिए मैंने चाँद तारे चुराए है ।

फिर कैसे मैं तुम्हे भूल जाऊ
फिर क्यों मैं तुम्हे
मुझे भूल जाने दू ?

2 comments:

गुलाब...

उन्होंने कहा, पूरे अमीनाबाद के लड़के हमपर मरते हैं तुम मानो न मानो वो हमसे बे-पनाह मोहब्ब्त करते हैं और अगर दराख से झुमका भी दिखा दूं तो ...