Monday, 10 July 2017

ये कहां आ गए हम...

राम मंदिर से शुरू हुई थी
गाय माता पर आकर अटक गई,
भईया काश हमको राजनीति आती होती।

सुलभ शौचालय से शुरु हुई थी
स्वच्छ भारत अभियान पर आकर अटक गई, भईया काश हमको राजनीति आती होती

बेरोजगारी से शुरू हुई थी
डिजिटल इंडिया पर आकर अटक गई,
भईया काश हमको राजनीति आती होती।

मंहगाई से शुरू हुई थी
#GST पर आकर अटक गई,
भईया काश हमको राजनीति आती होती।

गड्ढे मुक्त सरकार से शुरू हुई थी
Make in India पर आकर अटक गई,
भईया काश हमको राजनीति आती होती

चाय की चुस्की से शुरु हुई थी
मन की बात पर आकर अटक गई,
भईया काश हमको राजनीति आती होती।

पाकिस्तान क्रिकेट मैच से शुरू हुई थी
चाइना के माल पर आकर अटक गई,
भईया काश हमको राजनीति आती होती।

और ये सब कुछ एक अच्छे दिन शुरू हुई थी
और आज एक अच्छे दिन पर अटक गई।
भईया की काश सच में हमको राजनीती आती होती।

ये लेख पूरी तरह  से काल्पनिक है, इसका सत्यता
से दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं है।

जय श्री राम
आपका आभार।

2 comments:

गुलाब...

उन्होंने कहा, पूरे अमीनाबाद के लड़के हमपर मरते हैं तुम मानो न मानो वो हमसे बे-पनाह मोहब्ब्त करते हैं और अगर दराख से झुमका भी दिखा दूं तो ...