चलो तुम मुझको भूल जाओ
मैं तुमको भूल जाता हूँ ।
लेकिन जरा इतना तो बताओ ।
उन वादों का क्या करू ?
जो साथ रहने का किया था
एक दूसरे को हर बात के लिए माफ़ करदेने का किया था
जब जरुरत होगी तब साथ एक दुसरे का देने का किया था ।
उन बातों का क्या करू ?
तुमसे प्यार करते हैं
तुमपे ऐतबार करते हैं
तुमपे हा बस तुमपे जान निसार करते हैं।
उन रातो का क्या करू ?
जो तेरे यादों के सहारे कटी है
जो तेरे बारे मे सोचते हुए बीती है
तेरे ख्वाबो के साथ सजी है!
उन लम्हों का क्या करू ?
जो तेरे साथ बिताये है
जो तेरे इंतजार मे लुटाये है
जो तेरे लिए सजाये है !
उन सितारों का क्या करू?
जो तेरे लिए सजाये है
जो तेरी राहों मे बिछाए है
जो तेरी सौगात मे बदलो से चुराए है !
उन फरियादों का क्या करू ?
जो तेरे सजदे मे मांगे है
जो तेरे बुरे वक़्त के लिए बचाए है
जो खुदा से तेरे हिस्से के चुराए है !
उन इरादों का क्या करू ?
जो तुझे पाने को लाये है
जो तुझे पूरी दुनिया से जीतने को बनाये है
सबसे छिपा तुझे खुद का बनाने को पाए है।
उन जख्मों इअ क्या करू ?
जो तेरे लिए खाये है
जो तेरे हिस्से के थे पर मैंने खुदके लिए मांगे है
जो बाकी है उन्हें अपने हिस्से मे लिखवाए है ।
उन सांसो का क्या करू ?
जो तेरे लिए बचाए है
जो तेरे संग जीने को सँभालते आये है
जो तेरे हिस्से खुदा के घर कर आये है ।
उन सपनो का क्या करू ?
जो हमने सजाये है
जिसमे हर बार तू रानी बस एक बार खुदको राजा बनाये है
जिसमे तेरे लिए मैंने चाँद तारे चुराए है ।
फिर कैसे मैं तुम्हे भूल जाऊ
फिर क्यों मैं तुम्हे
मुझे भूल जाने दू ?
Mast h bhai
ReplyDeleteThank you..
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