Thursday, 16 March 2017

एक सितारा तेरे नाम का -3

आसमान मे एक सितारा तेरे नाम का
जिसे देख मैं अपनी नमाजे अदा किया करता हूँ।

शहर में कई जाग़िर मेरे नाम की। हा तेरे यार की
फिरभी तेरी ही गली में एक छोटा सा मकान लेने को सबकुछ नीलाम किये फिरता हूँ।

राज चलता हैं मेरा मेरे शहर में ,बादशाहों की चाल चला करता हूँ
पर तेरी ही गलियों में फ़क़ीर बन दर दर भटक तेरा नाम लिया करता हूँ।

शराब की एक बूंद से वाकिफ़ न था मैं तुझसे पहले हा आजसे पहले
और आज मैं पूरा मैखाना अकेले ही गले के पार किया करता हूँ।

कुछ मैखाने मिलकर गिरना चहते हैं मुझे ,
पर तेरे नशे के आगे ये भी सब झुककर सलाम किया करते हैं।

ये शराब के कुछ ही जामों मे बहकाना चहते हैं मुझे
और यहा मैं सदियों से तेरा ही नशा किया करता हूँ ।

बूढ़ी दादी आजकल पूछा करती है मुझसे, बेटा क्या बचपन की सुनाई कहानी याद है तुम्हें
मैं चुपचाप उनकी सुनाई तबकी कहानी मैं आपने आज को याद करलिया करता हूँ। उनके तबके राजा पर अपनी आजकी रानी कुरबान करदिया करता हूँ।

की आसमान में एक सितारा तेरे नाम का जिसे देख मैं अपनी नमाजे अद किया करता हूँ।
की आसमान में......

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