मुझसे मेरी जात न पूछो
मैं बंदा ऊपर वाले का हूँ
सुबह सवेरे मंदिर जाके शांत मनसे इश्वर को याद किया करता हूँ
हुई दूपहरहीया तो बैठ किसी मस्जिद मे इबादत-इंसानियत के नाम एक नमाज अदा किया करता हूँ।
ढली शाम तो बैठ किसी गुरूद्वारे के चबूतरे पर दो मीठी रोटिया खाया करता हूँ।
लौट घरको जाने से पहले
एक टुकड़ा मोमबत्ती का किसी गिरजाघर में जलाया करता हूँ ।
मुझे क्या फर्क पड़े
मन्दिर बने या बने चारदीवारी
मुझे तो जो प्यार से गले लगा ले
बस उसके गुन गाया करता हूँ
क्युकी मेरा नाम !
राम रहीम जोशेफ़ सिंह इंसान हैं ।
Nice lines
ReplyDeleteThank you sir
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