आसमान में एक सितारा तेरे नाम का
जिसे देख मैं अपनी नमाजे अदा किया करता हूँ ।
दीवारों पर एक तस्वीर तेरे रुह की
जिसे देख मैं सजदे किया करता हूँ।
रास्तों में एक पत्थर तेरे नाम का
जिससे मैं रोज ठोकर खाकर गिरा करता हूँ।
इस पूरी काएनात में बस एक नाम तेरे नाम का
जिससे मैं बेशुमार प्यार किया करता हूँ।
मेला लगा है इस पूरे जहाँ में
और फिरभी मैं यूही अकेले चल दिया करता हूँ।
सदियों जैसी एक एक रात मेरी
जिसमे बस तेरा इंतजार किया करता हूँ।
खुद खुदा के घर पहुच गयी तू
और मैं यहाँ हर दिन अपनी बारी का इंतजार किया करता हूँ।
और आज शमसान में एक ढेर तेरे वजूद का
जिसको उछाल मैं हवा से बाते किया करता हूँ।
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