Sunday, 5 March 2017

गजब ही किया जो वादे पर ऐतबार किया ।

गजब ही किया जो वादे पर ऐतबार किया

तेरी हर इश्क की झूठी साजीस पर ऐतबार किया ।

पता था तेरी गलियाँ मुनासिब नहीं मेरे इश्क के लिए

फिरभी तुझसे बेइंतह प्यार किया।

तेरे इश्क के जूनून में ये दिल पूरी दुनिया से लड़ बैठा

पर जब मिला न तेरा साथ तो सीसे जैसे टूट गया।

बे मौसम की बरसात में खुद को बेशुमार भीगा लिया

गिरी जितनी बूंद मुझमे बारिश की
अस्को में बहकर उसका एहसान भी चुका दिया

रात की सर्द हवाओ में खुदमें सिमट कर खुदको गले लगा लिया

न चाहते हुए भी उस रात को मैंने
तेरी यादो को जला खुदको जिन्दा फिरसे एकबार किया

सचमे में तेरे इश्क मे । ये क्या से क्या किया

गजब ही किया जो वादे पर ऐतबार किया ।

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