Wednesday, 8 March 2017

ये दौर एक नया है...


दिन मर्द नहीं होतान ही रात स्त्री है

ये दौर एक नया हैन अब बात ये वही है.

न अब बंद किवाड़ो मेंन बंद रीती रिवाजों में

न कोई आवाज़ दबेगीनई सुबह हो गई है

न अब बात ये वही है.



ये दौर एक नया हैन अब बात ये वही है.

ये दौर एक नया हैन बात अब ये वही है.


सब टूट जाएगी जंजीरेजिस रह वो चलेगी

सब पत्थर हट जायेगेये रह एक नई है

ये दौर एक नया हैन अब बात ये वही है.

ये दौर एक नया हैन अब बात ये वही है.


मां पुत्र और पुत्री से पहलेसंतान अब जानेगी

न रहेगा भेद साराये हवा उड़ चली है

ये जो लोग कहते सारेकी भेद ही बड़ा है

वो बात अब ये मानेकी इंसानियत बड़ी है

ये दौर एक नया हैन बात अब वही है.

ये दौर एक नया है न बात अब वही है.

गर ये चंद लफ़्ज़ मेरे जगा दे जो तुझको 
तो फ़िर मैं भी समझ जाउं की कलम ये नयी है
ये सोच एक नयी है

ये दौर एक नया हैन अब बात ये वही है.
ये दौर एक नया हैन अब बात ये वही है.
  


No comments:

Post a Comment

गुलाब...

उन्होंने कहा, पूरे अमीनाबाद के लड़के हमपर मरते हैं तुम मानो न मानो वो हमसे बे-पनाह मोहब्ब्त करते हैं और अगर दराख से झुमका भी दिखा दूं तो ...