दिन मर्द नहीं होता, न ही रात
स्त्री है
ये दौर एक नया है, न अब बात
ये वही है.
न अब बंद किवाड़ो में, न बंद
रीती रिवाजों में
न कोई आवाज़ दबेगी, नई सुबह
हो गई है
न अब बात ये वही है.
ये दौर एक नया है, न अब बात
ये वही है.
ये दौर एक नया है, न बात अब
ये वही है.
सब टूट जाएगी जंजीरे, जिस रह
वो चलेगी
सब पत्थर हट जायेगे, ये रह एक
नई है
ये दौर एक नया है, न अब बात
ये वही है.
ये दौर एक नया है. न अब बात
ये वही है.
मां पुत्र और पुत्री से पहले, संतान अब
जानेगी
न रहेगा भेद सारा, ये हवा
उड़ चली है
ये जो लोग कहते सारे, की भेद
ही बड़ा है
वो बात अब ये माने, की
इंसानियत बड़ी है
ये दौर एक नया है, न बात अब
वही है.
ये दौर एक नया है न बात अब
वही है.
गर ये चंद लफ़्ज़ मेरे जगा दे जो तुझको
तो फ़िर मैं भी समझ जाउं की कलम ये नयी है
ये सोच एक नयी है
ये दौर एक नया है, न अब बात ये वही है.
ये दौर एक नया है, न अब बात ये वही है.
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