Saturday, 28 January 2017

कर्म ।

"कर्म"

महाभारत में जब युद्ध दो महायोध्दाओं का था अर्जुन और और कर्ण के मध्य उस दिन  युद्ध से पूर्व श्री कृष्ण जी ने अर्जुन से कुछ वचन लिए । कि आज भले ही इस धर्म युद्ध मे मैं तुम्हारा सारथी हूँ , परन्तु आज तुम मेरे आदेश का पालन करोगे अर्जुन ।
अर्जुन ने सहमती जतायी । कृष्ण जी ने कहा हे अर्जुन एक बार फिर तुम अपने अस्त्र - शस्त्र का पुन: निरीक्षण कर लो , क्योंकि आजका  युद्ध इतिहास बनेगा । और श्री कृष्ण जी ने   रथ रंणभूमि की ओर मोड़ दिया। और उनके सामने थे विश्व के सबसे बड़े धनुर्धारी कर्ण । कर्ण ने युद्ध का एलान किया , परन्तु  कृष्ण जी ने अपना रथ दूसरी ओर मोड़ कर कर युद्ध छोड़ के रथ को तेजी से भगाते हुए जाने लगे ,  ये देख अर्जुन को बड़ा आश्चर्य हुआ ।  और कृष्ण जी से कहने लगे ये क्या कर रहे है माधव ? ये युद्ध के नियम के खिलाफ हैं । आप युद्ध छोड़ के पीठ दिखा के भाग नही सकते । ये देख कर्ण ने भी अपना रथ उसी दिशा मे मोड़ दिया और बारंबार अर्जुन को युद्ध के लिए ललकारने लगे । की कायरो की भाँति युद्ध छोड़ के क्यूँ भाग रहे हो अर्जुन , युद्ध करो मुझसे । अर्जुन ने कई बार कृष्ण जी से रथ रोक करके युद्ध करने की इच्छा जताई परन्तु कृष्ण ने एक बार भी उत्तर नहीं दिया । और वो रथ को तेजी से युद्ध भूमि से दूर ले जाने लगे । इधर पीछा कर रहे कर्ण ने फिर से दहाड़ लगायी , अर्जुन रुको और मुझसे युद्ध करो , आज मैंने अपने मित्र को वचन दिया है कि आज युद्ध में आर पार की लड़ाई लड़के आऊंगा। अर्जुन ने पुन: कृष्ण जी से रथ रोकने का आग्रह किया , इस बार कृष्ण जी ने उत्तर दिया , कि अर्जुन आज मैंने तुमसे कहा था की आज तुम मेरे आदेश का पालन करोगे । अर्जुन चुप हो गए , तभी एकाएक कृष्ण जी ने रथ एक जगह रोक दिया । लेकिन पीछे कर्ण का रथ एक दलदल मे फँस  गया  और उनके हाथ से धनुष छूट दूर गिर गया , और  इससे पहले की कर्ण संभल पाते, कृष्ण जी ने अर्जुन से कहा कि अब तुम कर्ण को युद्ध के लिए ललकारो । अर्जुन ने कहा ये अनीति है, ये धर्म के विरूद्ध है । परन्तु श्री कृष्ण जी ने बात दोहराते हुए यही कहा । अर्जुन ने कृष्ण जी की बात मानते हुए कर्ण को युद्ध के लिए ललकारा , कर्ण तो पहले कुछ समझ नही पाए परन्तु बार बार युद्ध की ललकार सुनकर उन्होंने अर्जुन को उत्तर दिया , ' अभी मैं रथविहीन हूँ , शस्त्रविहीन  हूँ । मैं युद्ध नहीं कर सकता । लेकिन अगर तुम्हे मुझपर प्रहार करना है तो तुम कर सकते हो । मैं अपना रथ का पाहियाँ दलदल से निकालने जा रहा हूँ ।  अर्जुन ने श्री कृष्ण जी को बोला कि किसी निहत्थे पर प्रहार करना युद्ध नीति और धर्म के विरुद्ध हैं । कृष्ण जी ने फिरसे अर्जुन को चेताया कि आज युद्ध से पूर्व क्या वाचन उन्होंने दिए थे । तब अर्जुन ने न  चाहते हुए भी कर्ण प्रहार कर दिया । और कर्ण वहीं घुटनों के बल गिर गए । कर्ण अर्जुन के इस प्रहार की पीड़ा सहन कर रहे थे , परन्तु उनकी आँखों में आंसू नहीं थे । वरन् कुछ प्रश्न थे,  उनकी आँखों में कृष्ण जी से । तब श्री कृष्ण जी ने समय को वहीं रोक दिया । और कर्ण के पास गए और कर्ण को देवलोक ले गए।कर्ण ने वहा एक एक करके प्रश्न पूछने शुरू किए माधव से ,
"क्यूँ मुझपर तब प्रहार कराया जब मैं रथविहीन था , शस्त्रविहीन था । क्यूँ मुझपर अर्जुन से तीर चलवाये जब मैं निहत्था था । "
"क्यूँ मुझे सारी ज़िन्दगी शूद्र पुत्र कहा गया , जबकि मैं एक क्षत्रिय था । "
"क्यूँ मैं इस रणभूमि मं अपनों के विरुद्ध लड़ रहा हूँ "।
क्या यह अनीति नहीं है। क्या ये पाप नहीं है।  क्या यही आपकी धर्मस्थापना हैं। तब श्री कृष्ण बोले ,
"जब भरी सभा मे द्रौपदी का चीर हरण हो रहा था , तब तुम भी सभी की भाँति चुप थे कर्ण ,  ये तुम्हारा पाप था "।
पांडव भले उस समय कुछ नहीं कर पाए , परन्तु उन्होंने पाप के खिलाफ आवाज़ उठाई , और तुम मौन रहे वत्स  , ये पाप था तुम्हारा । जितना पाप दुशाशन ने किया था उतना ही पाप तुमने चुप रहकर  किया था।
"जब अभिमन्यु को चक्रव्यूह में मारा जा रहा था , तब भी तुम चुप थे वत्स , वह भी तुम्हारा पाप था "।
तुमने धर्म का साथ ना देकर इस धर्म युद्ध मे पाप का साथ दिया इसलिए तुम पाप के पक्ष में खड़े हो वत्स , तब कर्ण की आँखों मे आंसू आने लगे जब उन्होंने देखा की जो तीर अर्जुन ने उनपर चलाये थे उसका घाव माधव के शरीर पर भी था । कर्ण ने कहा हे माधव मुझे ले चलिए अपने साथ इस अंतिम समय मे मैं आपको अपना सारथी चुनता हूँ । मुझे मेरे पापों से मुक्त करिए माधव । कृष्ण जी ने कहा मैं हमेशा से तुम्हारा सारथी बनना चाहता था , आज तुमने इन अंतिम क्षणों में मुझे अपना सारथी चुनकर कर तुमने अपने पापो से मुक्ति पा ली है । अब बस तुम्हें इस शरीर को त्याग दूसरे वस्त्र नुमा शरीर को धराण करना होगा । कर्ण ने कहा मैं आपके बताये मार्ग पर चलने के लिए तैयार हूँ, ले चलिए मुझे । कृष्ण जी कर्ण को पुन: रणभूमि में ले आये , और समय को पुन: वहीं से शुरू किया जहाँ पर रोका था । और अर्जुन से कहा अंतिम प्रहार करो कर्ण पर , कर्ण को पाप मुक्त करो अर्जुन । ये तुम्हरा सौभाग्य भी है और दुर्भाग्य भी । और तब अर्जुन ने अंतिम प्रहार कर्ण के कंठ पर किया । और कर्ण की जीवन लीला समाप्त की।

महाभारत के समय में ले जाने का मेरा एकमात्र उद्देश्य ये था कि मैं आपको याद दिला सकूँ  कि कर्म कभी आपको आपके कर्मो से माफ़ी नहीं देता । जैसे कर्म करोगे  वैसा ही फल मिलेगा आपको । जो गलत कर रहा है वो तो पापी है ही , वरन् जो पाप होते हुए देखकर अनदेखा करता है वो भी पाप का उतना ही भागीदार है।
इसीलिए कभी गलत होते हुए न देखे न गलत करें , और अगर उस समय आप गलत के खिलाफ लड़ नहीं सकते तो आवाज़ उठाये । आपकी एक आवाज़ गलत के खिलाफ गलत करने वालों के लिए चेतवानी हो सकती है कि वो ऐसा ना करें, बुराई के खिलाफ आवाज़ उठएँ,आपके साथ के लिए आएंगे लोग पहले आप अपना प्रयास तो करिए , यह मत सोचे की पहले कौन बोलेगा। पहले गलत के खिलाफ आप आगे आये , एकता मैं बड़ा बल है इसबात को समझें ।

Wednesday, 25 January 2017

मैं हिंदुस्तान हूँ ।

मैं हिंदुस्तान हूँ!



ना गीता ना क़ुरान 

ना बाइबिल का पाठ लिए चलता हूँ,


मैं हिंदुस्तान हूँ!

अपने दोनों कंधो पर ईमान लिए चलता हूँ ।

ना हरा ना भगवा 

ना चोला लाल लिए चलता हूँ ,


मैं हिंदुस्तान हूँ।

सर पे तिरंगे का शान लिए चलता हूँ। 


ना अज़ान ना गुड़गांन

ना ही घंटो की ताल पर चाल चला करता हूँ,

मैं हिंदुस्तान हूँ!

हर दिन जुबां पर देश का राष्ट्रगान लिए चलता हूँ ।


ना ईद ना दीवाली 

ना गुरु पर्व की याद लिए चलता हूँ,


मैं हिंदुस्तान हूँ!

चारों दिशाओ में अपने तिन रंगों की बहार लिए चलता हूँ!


ना दिल्ली ना गुजरात

ना कश्मीर की बात किया करता हूँ,


मैं हिंदुस्तान हूँ!

जर्रे-जर्रे कतरे-कतरे में हिमालय का ताज लिए चलता हूँ।


ना गोला ना बारूद 

ना तोपों की चाल लिए चलता हूँ,

मैं हिंदुस्तान हूँ। 

अमन और शांति का मशाल लिए चलता हूँ। 



जय हिन्द ।

Tuesday, 24 January 2017

वादा ।

चलो खुदसे एक वादा करता हूँ आज मैं ।

'की आजसे तेरी याद ना होगी
फिरतो शायद अब शाम भी ना होगी
शाम ना हुई तो कोई रात भी ना होगी
और रात ना हुई तो कोई याद ना होगी
और कोई याद ना हुई तो ख्वाबों में मुलाक़ात ना होगी
और मुलाक़ात ना हुई तो कोई बात ना होगी
कोई बात ना हुई तो शायद ये जान भी ना हगी'

चलो अपना किया वादा तोड़ रहा हूँ आज मैं ।

Sunday, 22 January 2017

मैं आपकी बेटी हूँ ।

मैं आपकी बेटी हूँ।
मुझे भी इस दुनिया मे आना है।
मेरा भी सपना है।
इस दुनिया मे आने का,
खुली हवा में पंख फैला दूर
कही उड़ जाने का।
मैं आपकी बेटी हूँ
मुझे भी इस दुनिया मे आना है ।
मेरा भी खेल खिलौने का होगा ।
मैं भी अपनी गुड़िया को खूब सजाऊंगी
उसकी शादी गुड्डे के राजकुमार से कराउगी।
मैं आपकी बेटी हूँ
मुझे भी इस दुनिया में आना है ।
मुझे भी भाई के साथ स्कूल जाना है।
मुझे भी चार किताबे पढ़
अपने माँ बाप का नाम जग मे कमाना है ।
मुझे भी मेरी मम्मी जैसे गोल रोटिया बनाना है ,
मुझे पापा के साथ मेला घूम के आना है ।
मैं आपकी बेटी हूँ
मुझे भी इस दुनिया में आना है
मै भी भाई संग ऑफिस , कॉलेज , खेल कूद प्रतियोगिता मै जाउंगी
मै भी सनिया नेहवाल की तरह ढेरो पदक जीत के लाऊंगी।
मै आपकी बेटी हूँ
मुझे भी इस दुनिया में आना है।
मुझे भी ब्याह होकर अपने ससुराल जाना है,
मुझे भी अपने पिया का संसार बसना है।
कोई तो हाथ बढ़ाओ,
किसी को कष्ट नहीं पहुचांउगी
एक पल का साथ दीजिये
सारी उम्र साथ निभाऊग़ी
किसी का कुछ नहीं बिगाड़ूगी
बस अपने हिस्से की सांसे जी के जाऊगी।
मैं आपकी बेटी हूँ मुझे
भी इस दुनिया में आना
है।

Thursday, 19 January 2017

गोल्ड फ्लेक ।

9 रु हो गया है छोटी गोल्ड फ्लेक का दाम   अमूल दूध के छोटे पैकेट के बराबर का दम है भैया । लेकिन सोचने वाली ये बात है कि अमूल अपने विज्ञापन पर सालाना करोड़ो खर्च करती है , वही सिगरेट पर करोड़ो का टेक्स सरकार लगाती है । नए टेक्स के साथ नए सड़े ,गले, चैहरे डिब्बो पर लगाने का आदेश देती है , ताकि लोगो मे सिगरेट से होने वाली बीमारी की जानकारी हो ।

लेकिन मार्केट मे सिगरेट के मुकाबले दूध की खपत कम है। अपनी सोच हैं।
दूध शयाद सेहत को नुकसान पहुचती होगी सिगरेट फेफड़ो मे नयी जान डालती होगी।
और भारत के नियम कानून के अनुसार सिगरेट का प्रचार प्रशार करने पर प्रतिबंध है। बिना किसी विज्ञापन के सिगरेट सभी प्रोडक्ट को सेलिंग मे पीछे छोड़ देती है।
'एकबार सभी सिगरेट पीने वाले अपनी पीठ थप थापाये बड़े गर्व की बात है ये हमारे लिए '
अन्य प्रोडक्ट मे हीरो हिरोइन से विज्ञापन कराया जाता है , मगर सिगरेट में विज्ञापन के लिए सड़ा , कटा , गला, फेफड़ो से ही कम चल जाता है । जिन्दा या मुर्दा चलेगा । हर साल अरबो का कारोबार करती है तम्बाकू कम्पनियाँ , इतने समाजिक रोक टोक के बावजूद । इसका श्रेय हमको ही जाता है , मम्मी के 50 रु जो सब्जी लाने को जो दिए थे। जिसमे से 20 रु का आलू 20 का मटर लाना था , और 10 का धनिया मिर्चा भी लाना था। लेकिन कोई बात नहीं आज खाना बिना धनिया मिर्चा का बन जायेगा 10 रु मे 9 की छोटी गोल्ड फ्लेक लायेगे 1 रु का माउथ फ्रेशनर खायेगें , ताकि सक की कोई गुंजाइश ना रहे । ये छोटी मोटी बचत करना बचपन मे पापा से ही सीखी थी , जब वो 10रु देके बटर ब्रेड लाने को बोलते थे और बचे 1रु मे बीड़ी का बण्डल  लाने का आदेश देते थे।खानदानी हुनर है भैया। अगर सिगरेट पीने वाले लोगो से पूछा जाये कि क्या आप सिगरेट छोड़ना चहते है तो सबका जवाब होगा , 'हाँ छोड़ना चाहते हैं पर छूट नहीं रही।
और कुछ लोगो के जवाब बड़े अजीब होते है । जैसे
' यार भाई ना छुट रही मुझसे बहुत कोशिस करली '
' यार माचिस दो जरा जल्दी प्रिया ने कसम दी है कलसे सिगरेट ना पीने की ।
- तो अभी क्यूँ पीने जा रहा है?
'भाई कल मतलब 12 बजे के बाद ,अभी पी सकता हूँ मैं '
'यार कोई बात नहीं कालेज लाइफ हैं , कौनसा मैं रोजाना पीता हूँ , एक शुबह एक शाम और एक रात को ही तो पीता हूँ । तीन ही तो हुए ' ।
'यार मुझे नुकसान नहीं करेगी मैं धुँआ अन्दर थोड़ी ना लेता हूँ '।
-तूने तो कसम खाई थी कलसे सिगरेट नहीं पिएगा तू ।
'यार छोटी गोल्ड फ्लेक ना पीने की कसम खाई थी, ये गरम गोदाम हैं । ये तू भी एक कश मार ये नुकसान नहीं करती ' ।
'यार ये लात सबसे बुरी हैं ये नहीं छूट रही दिन रात यहीं टेंसन हैं कि कैसे छोड़ू इसको '
-तो अभी क्यूँ पी रहा है ? फेंक इसको
'यार देख नहीं रहा मैं टेंसन मे हूँ इसलिए पी रहा '
- मतलब हद हैं सिगरेट छोड़ने के लिए भी सिगरेट । कहते हैं कि सिगरेट का धुँआ ऊपर उड़ाने वाले शो ऑफ मे सिगरेट पीते हैं , जो सामने धुँआ उड़ाये वो बेफिक्र होकर पी रहा है । और जो निचे बैठ के पिए चुपचाप तो समझ जाओ दुनिया भरका ग़म इन्ही के कंधों पर हैं। जो सिगरेट पीके भुलाना चाहते हैं। और किसी महापुरुष ने तो यहाँ तक कह दिया की चार लोगो मे मील बाँट के सिगरेट पीने से प्यार बढ़ता हैं।
नोट - ऊपर लिखी सभी बाते काल्पनिक हैं । जिनका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं है, इस लेख को लिखने वालो को ज्यादा सरीफ ना समझे । वो खुद दायें हाथ मे सिगरेट सुलगा के ये सब लिख रहा है । अब बात वही हैं शराबी खड़ा स्टेज पर शराब ना पीने की प्रेणना दे रहा हो।
इसी बात पर चंद पंक्तियाँ पेश करना चाहूँगा जरा गौर फरमाइयेगा ।
'की जल रही मेरी ज़िन्दगी यूहि एक सिगरेट के बहाने
उड़ रही एक एक सांसे सफ़ेद धुंए के बहाने ।

जब पहली सिगरेट जलाई तब पता ना था ये बार बार जलानी पड़ेगी
हर बार ये आखरी कहकर जलाता हूँ
लेकिन ये हर बार एक और आखरी कहकर चली आती है

आये ज़िन्दगी तुझसे मेरी दुश्मनी हो गयी
एक सिगरेट पी और पूरी ज़िन्दगी मेरी मौत के गिरफ़्त मे हो गयी ।

धुम्रपान सेहत के लिए लाभदायक हैं
पीते रहें । 100 मे से एक 0 घटता है तो घटने दीजिये ज़िन्दगी लम्बी नहीं होनी चाहिये और भी कतारे हैं आने दीजिये । सबको ।

#35

Wednesday, 18 January 2017

दीवारे ।

राम मंदिर और बाबरी मस्जिद पर
लड़ने वाले अगर चंद आएते कुरान की और कुछ श्लोक गीता के पढ़ ले तो

तो शायद उन्हें ये बात समझ आ जाये की
नमाज मंदिर मे भी अदा की जा सकती है
और भगवन की पूजा मस्जिद मे भी हो सकती है

क्या रखा है मंदिर मस्जिद की दीवारों मे
काम तेरा बस इबाबत करना है।
कहीं भी करले।

Friday, 13 January 2017

#25

बेपरवाह ।

बेपरवाह सा मैं सरफिरी सी जो है ये ज़िन्दगी मेरी
बड़ी गुश्ताखियां होती है रास्तो मे

कुछ हसींन चेहरों पर नजरे बार बार पड़ती है
लेकिन ये जो है आँखे मेरी ।
उन हजार चेहरों मे इक तुझे ढूढ़ नहीं पाता
बड़ी खामोसी से चल रही ज़िन्दगी मेरी

हजारो के बीच चुपचाप सा खुदसे बेखबर सा रहता हूँ
जिसको खुद की सुध तक नही रहती
युही कतरा कतरा जिए जा रहा।

सामने एक नहीं दो नहीं तीन नहीं चार हजार रस्ते है
लेकिन तुझ तक जाने वाला ही रास्ता याद नहीं आ रहा ।

अभी कहानी खत्म नहीं हुई मेरी

क्युकी गर इश्क अधुरा हैं
तो कहानी भी अधूरी रहेगी

Wednesday, 11 January 2017

पहली बार ' आखरी बार '

कभी कभी लगता है तुम वो हो ही नहीं कहीं
और कभी कभी लगता है तुम यहीं हो कहीं ।

यहीं कहीं आस-पास मेरे
बस मैं तुम्हें देख नहीं पा रहा हूँ
तुम मुझमे अभी भी धड़कती हो
मुझसे ज्यदा ये तुम्हारी नाम की सांसे लेकर धड़कती हैं।

अभी जिंदा है कहीं मुझमे तू ,
बहुत दिनों बाद याद आये हो आज।
झूठ है।
लेकिन आज बहुत याद आये हो ये बात तो सच है ।

अगर तुम मुझे देख रही हो तो मुझे बुला लो
मैं कबसे उसी काफी शाप के सामने
उन्ही गलियों मे
उन्ही रास्तो पर भटक रहा हूँ ।

कोई इधर से तुम्हारी जान पहचान का निकलता ही नही
जिससे मैं तुम्हरा हालचाल पूछ सकू

कई शनिवार के रविवार निकल गए तुम्हारे इंतजार मे
अब तो आ भी जाओ

मैं तुम्हे वही मिलूँगा

जहाँ हम पहली बार मिले थे
जहाँ हम आखरी बार मिले थे ।

Saturday, 7 January 2017

उलझी उलझी सी है जिंदगी।

उलझी उलझी सी है ज़िन्दगी मेरी
और फिर भी तुम हर दिन एक नया सवाल खड़ा कर देती हो।

गर जरा सा भी शक हो मेरे ऐतबार पर तो इश्क से पूछलो ,न याकिन हो तो मोहब्बत से बहस करलो

तुम्हे मेरी ये हर सब्र की इन्तहां बता देगी
तुमसे चाहत कितनी है और बेताबी कितनी है सब बता देगी ।

पर तेरी हर नराजगी से बे पन्नाह मोहब्बत है  तेरी हर बचकानी हरकतों से इसे बेइन्तहा इश्क है मैं हर पल तुझे तेरी ख़ामोशी से प्यार करता रहा हूँ।

तू जितनी बार मुहँ फेर के गयी है ये  पागल दिल उतनी बार तेरे पास अपना प्यार लेके आया है । 

ये बात भी सच है की खुदा से ज्यादा मैंने तेरी इबादत की है ,
शयाद इसीलिए खुदा अब मेरी सुनता ही नहीं।

मांगता अब भी तेरे लिए ही हूँ लेकिन अब वो कहने लगा है,
जिसकी इबादत करता है उसी से मांग ।

जा उसी से थोड़ा सुकून भी मांग ले अपने लिए ,
कबतक यहाँ भटकता रहेगा। घुट घुट के जीता रहेगा।

जबतक सांसे चल रही है थोड़ा अपने लिए भी जी ले
वरना ऊपर आकर फ़रियादे मत करना
शिकायते मत करना की तुझे मैंने ज़िन्दगी नहीं दी थी । तुझे मैंने दिल नहीं दिया था ,

अब जब सबकुछ तूने उसके नाम करदिया तो मैं क्या करू
मैंने तो सबको बराबर दिया है।

लेकिन तूने ही अपनी खुशियों के बदले
उसका गम माँगा था । और तेरी दुआ मे इतनी  सिद्दत थी की मैं कभी मना नही कर सका और तू भी कभी आपनी आदतों से बाज नही आया ।

और तेरा ये हल हो गया की तुझे आज इश्क और वफ़ा के आगे कुछ नही दिखयी दे रहा ,

तू सुन भी रहा है मैं तुझसे क्या बोल रहा ।
या हमेसा की तरह उसका नाम लिए जा रहा। और मुझे फिरसे अनसुना किये जा रहा।

उलझी उलझी सी है जिंदगी।

उलझी उलझी सी है ज़िन्दगी मेरी
और फिर भी तुम हर दिन एक नया सवाल खड़ा कर देती हो।

गर जरा सा भी शक हो मेरे ऐतबार पर तो इश्क से पूछलो ,न याकिन हो तो मोहब्बत से बहस करलो

तुम्हे मेरी ये हर सब्र की इन्तहां बता देगी
तुमसे चाहत कितनी है और बेताबी कितनी है सब बता देगी ।

पर तेरी हर नराजगी से बे पन्नाह मोहब्बत है  तेरी हर बचकानी हरकतों से इसे बेइन्तहा इश्क है मैं हर पल तुझे तेरी ख़ामोशी से प्यार करता रहा हूँ।

तू जितनी बार मुहँ फेर के गयी है ये  पागल दिल उतनी बार तेरे पास अपना प्यार लेके आया है । 

ये बात भी सच है की खुदा से ज्यादा मैंने तेरी इबादत की है ,
शयाद इसीलिए खुदा अब मेरी सुनता ही नहीं।

मांगता अब भी तेरे लिए ही हूँ लेकिन अब वो कहने लगा है,
जिसकी इबादत करता है उसी से मांग ।

जा उसी से थोड़ा सुकून भी मांग ले अपने लिए ,
कबतक यहाँ भटकता रहेगा। घुट घुट के जीता रहेगा।

जबतक सांसे चल रही है थोड़ा अपने लिए भी जी ले
वरना ऊपर आकर फ़रियादे मत करना
शिकायते मत करना की तुझे मैंने ज़िन्दगी नहीं दी थी । तुझे मैंने दिल नहीं दिया था ,

अब जब सबकुछ तूने उसके नाम करदिया तो मैं क्या करू
मैंने तो सबको बराबर दिया है।

लेकिन तूने ही अपनी खुशियों के बदले
उसका गम माँगा था । और तेरी दुआ मे इतनी  सिद्दत थी की मैं कभी मना नही कर सका और तू भी कभी आपनी आदतों से बाज नही आया ।

और तेरा ये हल हो गया की तुझे आज इश्क और वफ़ा के आगे कुछ नही दिखयी दे रहा ,

तू सुन भी रहा है मैं तुझसे क्या बोल रहा ।
या हमेसा की तरह उसका नाम लिए जा रहा। और मुझे फिरसे अनसुना किये जा रहा।

Thursday, 5 January 2017

'फ़ना करदे' 'रव़ा करदे' !

अब रातों को नींदों से उठ जाता हूँ,
क्यों अजीब सी ये बेकरारी है
हा इश्क है तुमसे 
ये होना तो लाज़मी है।

गर आती है तू हर रात के ख्वाबों मे
तो फिर क्यूँ नींदों से जुदाई है।

खूब जद्दो जतन कर लिये रातों से हमने
फिर भी तेरी हर कमी को
दिल से दिल की गवाही है।

ना रहे कोई पर्दा तेरे मेरे दरमियाँ
इस वास्ते हमने
खिड़किया दरवाजे खुले छोड़ दिए
फिर भी न जाने क्यूं हर कही से तेरे ना आने की खामोशी सी है।

पूरा घर रोशन कर रखा है तेरी तशवीरो से हमने
फिर भी न जाने क्यूँ किसी मे तेरा अश्क ना दिखने की साजिश सी है।

अब बस कोई एक सुकून की रात दे दे
ना हो सके तो मेरे हिस्से का ही मुझे प्यार दे दे।

बड़ा बेसब्र सा हुआ जा रहा ये दिल आज फिर एक बार 
कुछ न हो सके तो इसे अब अपने इश्क से आज़ादी दे दे।

मैं अब खो हो जाना चाहता हूँ आशमान
मे किसी तारे के बीच
चमकना चाहता हूँ लेकिन
बिन तेरे रूह ।

अब तू मेरा हिसाब करदे
जो बचा दर्द है उसे अगले जन्म का कर्जदार करदे
लेकिन मुझे इस दर्द से अब 'फ़ना करदे'
यहाँ या वहां अपने घर ही   'रव़ा करदे' !

#17

Tuesday, 3 January 2017

कहानीकार ।

कहनी लिखने वालो की अपनी कोई कहानी नहीं होती है ।
होती भी है तो बिलकुल आधी आधूरी , टूटी फूटी बिखरी सी ।
इसीलिए वो दूसरो की कहानियो अपनी कहानी तलाशते है।
और अपनी कहानी का कुछ हिस्सा सबकी कहानियो मे डालकर अपनी लिखी हुई कहानी को पूरा करने की कोशिस करते है
क्युकी आधूरी कहानी का दर्द
इनसे बेहतर कोई नही समझ सकता ।
इसीलिए एक अच्छा कहानीकार
पर पन्ने पर कहानी सुनने वालो को बताता चलता है ।
कहानी आगे भी जरी रहेगी,
ये कहानी आगे भी जरी रहेगी।

Sweet revenge...!

You- hello brother how are you :)
People- talk to letter I'm busy !

(After sometimes)

People- hello sir :)
You- talk to letter now I'm to busy!

(Called revenge)

'but' sweet revenge is

People- hello sir ...' its kk sir i think you are busy we talk to letter :)
You- no I'm always free for you 'say

(It's called true sweet revenge)

गुलाब...

उन्होंने कहा, पूरे अमीनाबाद के लड़के हमपर मरते हैं तुम मानो न मानो वो हमसे बे-पनाह मोहब्ब्त करते हैं और अगर दराख से झुमका भी दिखा दूं तो ...