चलो खुदसे एक वादा करता हूँ आज मैं ।
'की आजसे तेरी याद ना होगी
फिरतो शायद अब शाम भी ना होगी
शाम ना हुई तो कोई रात भी ना होगी
और रात ना हुई तो कोई याद ना होगी
और कोई याद ना हुई तो ख्वाबों में मुलाक़ात ना होगी
और मुलाक़ात ना हुई तो कोई बात ना होगी
कोई बात ना हुई तो शायद ये जान भी ना हगी'
चलो अपना किया वादा तोड़ रहा हूँ आज मैं ।
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