अब रातों को नींदों से उठ जाता हूँ,
क्यों अजीब सी ये बेकरारी है
हा इश्क है तुमसे
ये होना तो लाज़मी है।
गर आती है तू हर रात के ख्वाबों मे
तो फिर क्यूँ नींदों से जुदाई है।
खूब जद्दो जतन कर लिये रातों से हमने
फिर भी तेरी हर कमी को
दिल से दिल की गवाही है।
ना रहे कोई पर्दा तेरे मेरे दरमियाँ
इस वास्ते हमने
खिड़किया दरवाजे खुले छोड़ दिए
फिर भी न जाने क्यूं हर कही से तेरे ना आने की खामोशी सी है।
पूरा घर रोशन कर रखा है तेरी तशवीरो से हमने
फिर भी न जाने क्यूँ किसी मे तेरा अश्क ना दिखने की साजिश सी है।
अब बस कोई एक सुकून की रात दे दे
ना हो सके तो मेरे हिस्से का ही मुझे प्यार दे दे।
बड़ा बेसब्र सा हुआ जा रहा ये दिल आज फिर एक बार
कुछ न हो सके तो इसे अब अपने इश्क से आज़ादी दे दे।
मैं अब खो हो जाना चाहता हूँ आशमान
मे किसी तारे के बीच
चमकना चाहता हूँ लेकिन
बिन तेरे रूह ।
अब तू मेरा हिसाब करदे
जो बचा दर्द है उसे अगले जन्म का कर्जदार करदे
लेकिन मुझे इस दर्द से अब 'फ़ना करदे'
यहाँ या वहां अपने घर ही 'रव़ा करदे' !
sabas bache drd h sbdo me 👍
ReplyDeleteThank you sir
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