Friday, 28 April 2017

मैं एक सिपाही हूं...

मैं एक सिपाही हूं।

मैं वहां दूर रेगिस्तान की धूल खाता हूं ,
ताकि तुम तक अच्छी हवा पहुचं सके ।

मैं वहां -50 डिग्री के निचे बर्फ में जगता हूं ,
ताकि तुम रजाई के अन्दर के  आराम से सो सको।

मैं वहां उन ऊची ऊची पहाड़ियों पर सोता हूं,
ताकि तुम्हें तुम्हारा घर मिल सके।

मैं वहां गोलियों से दिवाली और खून से होली खेलता हूं,
ताकि तुम अपने बच्चो के साथ होली दिवाली मना सको

मेरी माँ मेरे बच्चे मेरा साल भर इंतजार करते है,
ताकि तुम घर जाकर अपने अपनों से मिल सको

मैं वहां सीधे सीने पर 10-10 गोलिया खाता हूं,
ताकि तुम्हे यहा एक खरोच भी ना आ सके

मेरी पत्नी अगली सुबह बेवा हो जाती है,
ताकि तुम्हारी पत्नी के मांग में सिंदूर हर शुबह सजता रहे।

मैं वहां सुखी रुखी रोटिया खाता हूं,पानी पिघला के पीता हूं,
ताकि तुम आपने माँ के हाथ की रोटिया खा सको

और तुम यहाँ मुझे फिर भी बलात्कारी, घूसखोर, हैवान बोलते हो मेरी वर्दी को तार तार करते हो

और देखो फिर भी मैं चुपचाप शरहद पर खड़ा, तुम्हारी रक्षा करता रहा हूँ । तुम्हारी एक मुस्कान पर आपनी ज़ा नावछावर कर रहा हूँ।

मैं यहाँ से हाथ में लोहे का बक्शा लेकर जाता हूँ
उधर से मैं लकड़ी के बक्से में आ जाता हूँ।

फिर भी खुस हूँ फिर भी मेरा परिवार आबाद हैं फ़ख्र हैं की मेरा देश आजाद हैं ।
क्युकी में मरने के बाद इन्सान नही ,शहीद कहलाता हूँ  । क्युकी मैं एक सिपाही हूं ।
और यही मेरी पहचान हैं
मेरा देश ही मेरी शान हैं।
ये मेरा हम सबका हिंदुस्तान हैं।

जय हिन्द

#dadicated_to_indian_Army_

मुश्कुराइये आप इश्क में है...

वफ़ा,जफ़ा,इश्क,मुश्क
क्या है तू।

यहाँ,वहां,इधर,उधर
कहाँ है तू।

गिला,सिकवा,आराम,हराम
सबमे है तू।

दीन,इमान,दुआ,नमाज,
शामिल है तू

हसी,खुशी,रोना,गुनगुनाना,
पागल है तू

सुबह,शाम,दिन,रात
किसमे है तू।

मुस्कुराइये आप इश्क में है ।

काश कोई...

काश कोई ऐसा सितारा भी होता आशमां में,
जो सिर्फ मेरे लिए चमकता पुरे आसमान में।

काश कोई ऐसा शख्स भी होता इस जहाँ में,
जो सिर्फ मेरे लिए सजता हर शाम में।

काश कोई ऐसी बात भी होती तेरे लबों में,
जो सिर्फ मेरे लिए बोली गयी होती मेरे लिए,तेरे हर तलब में ।

काश कोई ऐसी बारिश भी होती पूरे सावन में,
जो सिर्फ गिरती पूरे शहर को छोड़,मेरे छत में।

तुमने मेरी...

तुमने मेरी

रातों की नींद

दिनका शुकून

शुबह की शाम

रातों की फरियाद

खुशियों की बात

प्यार की सौगात

सपनों वाली रात

ठंडी वाली शाम

मेरा वाला चाँद

बारिशों की रात

मेरे सरे ख़्वाब

"वो सारी चीजे छीन ली है जिनसे मैं जिन्दा रहता था"

ख़ुदा करे तुझसे ,

तेरे सारे गम

तेरे सारे डर

तेरे बुरे ख़वाब

तेरी सारी फ़िक्रे

तेरी सारी बैचेनिया

तेरी सारी परेशानियाँ

तेरी अधूरी कहानियां

तेरी बुरी बतियां

तेरी बुरी सहेलियां

तेरी सारी गलतियां

और हा तेरी सारी नफरते

छीन जाये
जिनसे तुझे जीने मे तकलीफ़ हो रही हो।

ख़ामोश रहो...

अये दिल चल भी दे अब

रास्ता बदल

यहाँ से वहां चल ,

शायद इश्क हो जाये

शायद तू ठहर जाये ।

शायद शुकून मिल जाये

शायद तुझेको तू मिल जाये

शायद तुझको वो मिल जाये

शायद मौत ही मिल जाये

तू चल शायद ख़ुदा ही मिल जाये,

दिल--- ख़ामोश रहों ,
मेरा यार सो रहा है नींद टूट गयी उसकी तो
सजाये मौत मिलेगी ।

हलक से जुबां तक...

आज मैं...

जैसे आज मैं लिखने के सिवा कुछ नहीं कर पा रहा हूँ,

ठीक वैसे ही कल तुम मुझे पढ़ने के सिवा कुछ नहीं कर पाओगी,

और यकिन मानो मैं अपना ये वादा मैं  पूरा करके जाऊंगा,

इतना लिखूंगा तुमको
की
खुद एक कहानी बनके जाऊंगा।

मैं तुम मे जी के मरता जाऊंगा ,
तुम मुझमे जी के जीते जाओगी।

और ये करवा मेरे प्यार का आखरी साँस तक चलता रहेगा
मै तुम में सो के सो जाऊंगा
और फिर मैं खुद में सो के मिट्टी में मिल जाऊंगा।

स्याही कलम की...

तेरी जुल्फों की मशहूरआंधियो ने मेरी
चाहतों के पन्नो पर इश्क की रूहानी स्याही गिरा दी थी,
लाज़मी था उसके बाद पन्नो पर चाहत का बिख़र जाना,
फिर मैंने खुद को और अपनी कलम को संभाला
और लिखने लगा,आबाद-ए-इश्क की
बर्बाद कहानियां,
क्या कहे तेरी जुल्फों का कुसूर था या था कुसूर मेरी नजरो का ,
लेकिन हां अब ,

दर्द मेरे दिल मे हैं
और स्याही मेरी कलम की लाल है।

Wednesday, 26 April 2017

पत्र

पत्र ।

बचपन की किलकारी में,
आँगन की फुलवारी में,
पालने के झूलों में,
माटी के सड़को में,

मैं जब-जब हँसा,
मैं जब-जब खेला,
मैं जब-जब झूला,
मैं जब-जब गिरा,

माँ तू साथ थी
माँ तू साथ थी
हाँ माँ तू साथ थी।

मेले की भीड़ में,
खट्टे सपनों के मेल में,
भूतो की कहानी में,
घर के हर कोने में,

मैं जब-जब खोया,
मैं जब-जब जगा,
मैं जब-जब डरा,
में जब-जब छिपा,

माँ तू साथ थी
माँ तू साथ थी
हाँ माँ तू साथ थी।

बरसात की रातों में,
ठण्ड रातों की छाव में,
गर्मी की उमस में,
गरजते बादलों की धमक में,

मैं जब-जब भीगा,
मैं जब-जब ठिठुरा,
मैं जब-जब तिलमिलाया,
मैं जब-जब सहमा,

माँ तू साथ थी
माँ तू साथ थी
हाँ माँ तू साथ थी।

साईकल की पहली दौड़ में,
बुख़ार से तपते बदन में,
उड़ चिड़िया उड़ मैना के खेल में,
मस्ती वाली छुक-छुक रेल में,

मैं जब-जब चोट खाया,
मैं जब-जब तड़पा,
मैं जब-जब पकड़ा गया,
मैं जब-जब गिरा,

माँ तू साथ थी
माँ तू साथ थी
हाँ माँ तू साथ थी।

पाठशाला की पहली क्लास में,
पापा की पहली डांट में,
परीक्षा से पहली वाली रात में,
झूठे समाज के अभिमान में,

मैं जब-जब डगमगाया,
मैं जब-जब रोया,
मैं जब-जब घबराया,
मैं जब-जब लड़ा,

माँ तू साथ थी
माँ तू साथ थी
हाँ माँ तू साथ थी।

मेरे तब में,
मेरे अब में,
मेरे सब में,
और मेरे आने वाले कल में,

जैसे तू साथ थी,
जैसे तू साथ है,
जैसे तेरा साथ है,
जैसे तेरा साथ रहेगा,

मेरा भी वादा हैं तुझसे माँ।

तेरी झुकती कमर में,
तेरे लड़खड़ाते कदम में,
तेरी सफ़ेद मुस्कान में,
तेरे बुढ़ापे की छाव में,

तेरा सहारा बनूगां,
तेरे कदम बनूगां,
तेरा चैहरा बनूगां,
तेरी सुबह बनूगां,

तेरा बेटा हूँ मैं माँ
तेरा बेटा हूँ मैं माँ ।
तेरा ही बेटा हूँ मैं माँ

Sunday, 23 April 2017

ऐसा भी कुछ इंतजाम करे ।

तमिलनाडू- 34000
आंध्र प्रदेश-43000
कर्नाटका-34000
केरला-28000
कोचीन,के आस पास-1800
साऊथ इंडिया-108000
महाराष्ट्र-4500-0
मथुरा वृंदावन-5000
हिमाचल प्रदेश-2000

सरकारी लिस्ट में-  के अनुसार ये सख्या हैं हमारे यहाँ मंदिरों और तीर्थ धामों की ।
300000 से ज्यादा की संख्या में मस्जिद भी है हिंदुस्तान में। हिंदुस्तान में मंदिर मस्जिद की संख्या आप गिन नहीं सकते क्युकी ये नामुमकिन के बराबर है,वो इसलिए क्युकी यहाँ हर घरके आंगन में तुलसी मैया और घर के किसी कोने में मंदिर है । और नमाज के लिए चबूतरा हैं । इसीलिए गिनती करना कठिन है । और एक सर्वे के मुताबिक हिंदुस्तान मे हम जहा भी है उसके 7 किलोमीटर के आस पास मंदिर है
हम हिंदुस्तान में बाकि सभी चीजों की गिनती कर सकते है ,जैसे इंसान , हम अपने आप को गिन सकते है , हम अपने घर अपने शहर गिन को सकते है । जैसे -
हिंदुस्तान मे कुल -108000 गाँव तय और  बाकि की गिनती चल रही है ।
क़स्बे-638000 के आस पास है
बड़े शहरों मैं हमारे पास 400 शहर है।
हमारे यहा अस्पताल सरकारी -35416 से 59332 के आस पास है । जिनमे डॉक्टर की संख्या मात्र 2% है गर्व की बात है या शर्म की नहीं कह सकते
निजी बड़े अस्पतालों में -16000 के आस पास
और हाँ हिंदुस्तान में स्कूल,कॉलेज भी गिनती की जा सकती है।
नाम के बारबार हैं अध्यापक भी जो ना काम के बराबर है
अब बात पर आते है। एक परमात्मा को पूजने के लिए हमने कितने मंदिर मस्जिद बना डाले,या यु कहे की हमने भगवांन के आड़े खुद को ही बाँट डाले,
और इतने मंदिर मस्जिद होने के बावजूद अभी भी हम एक और मंदिर मस्जिद के लिए लड़ रहे है। कश्मीर के चंद टुकड़ो के लिए देश विदेश के दौरे कर रहे है। बहार से देश को सुरक्षित और क्या अन्दर से हम उसे खोकला नहीं कर रहे है। हमारी मीडिया तो धन्य है। वो सोनू निगम ,और मंत्रियो के बयान में इतना उलझ जाता है की उसे देश के और मुद्दों का पता ही नही चलता, या यु कहे हमें जो चीज़ देखने में मजा आता है वो वही दिखाते है।

देश का किसान अपना मूत्र पी रहा
गर्व से कहो हम कृषि प्रधान देश है,

देश की महिलओं को बीच बाजार नंगा किया जाता है,उनके मुहँ में तेजाब घोला जाता है,
गर्व से कहो हम पुरुष प्रधान देश है।

देश का नौजवान पढ़ाई के बाद नौकरी न पाने पर अपनी जान दे रहा,
गर्व से कहो हम युवा शक्ति का देश है।

हिंदू-मुस्लिम मंदिर-मस्जिद के लिए लड़ रहे,
गर्व से कहो हम सब एकता के भेष में हैं।

पढ़ा लिखा नौजवान बाजार में जूते सी रहा , और अगूठा छाप देश का भविष्य बना रहे,
गर्व से कहो हम कल की नयी सोच हैं ।

रहने को छत नही,खाने को खाना नहीं , और पहनने को कपड़े नहीं,
गर्व से कहो हम एक साथ दस मिसाइल आकाश में छोड़ने की होड़ में है।

किसान कर्ज मे डूबा मरता जा रहा,
गर्व से कहो फिर भी हम दुसरे देश से उधार लेके बुलेट ट्रेन को चुनावी मुद्दा बनाने के जोश में है।

100 रूपये की खातिर यहा हम एक दुसरे को मार रहे ,
गर्व से कहो हम शांति प्रिय महोदय हैं।

अब एक लाइन मेरी कलम के लिए भी ।
कागजों पर लिखने वाले जेल में और हर चुनाव में हमको टोपी पहनाने वाले इसी देश के पार्लियामेंट में है।

देश को बहार से बचाने से क्या फायेदा जब अन्दर ही अंदर ये खोकला होता जा रहा है , सरकारे आएगी जाएगी , लोग बदल जायेगे । लेकिन अगर थोड़ा थोड़ा हम खुद को बदल ले यार तो सच में ये देश बदल जायेगा।

चलो छोड़ो यार मंदिर मस्जिद की बाते
चलो कुछ काम करे ,तुम अपने घरको अयोध्या बनाओ,मैं अपने घर को मदिना बनाऊ , ऐसा भी कुछ इंतजाम करे ।
और इस ज़मी को पहले जितना पाक़ बना दे की ख़ुद ख़ुदा निचे आकर हमारी बात करे।

मेरे तब में,मेरे अब में,मेरे सब में ।

मेरे तब में
मेरे अब में
मेरे सब में
तू थी
तू है
तू ही रहेगी

मुझसे पहले
मेरे बाद
मेरे साथ
भी तू ही है
भी तू है
भी तू ही रहेगी

तेरी याद
तेरी बात
सारी रात
जो है
ये जो है
युही रहेगी

ये जो है
वो जो होगा
जो होने वाला है
इश्क है
तुझसे होगा
बस तेरा मेरा साथ

Wednesday, 19 April 2017

पूरा पढ़िये


स्नैपचैट का बवाल हो या फिर सोनू निगाम का अपना मिज़ाज हो ये इंडिया है भैया,यहा फ्रीडम ऑफ़ स्पीच का पूरा फायेदा उठायेगे और बोलेगे हम ! लेकिन जल्दी से जल्दी बोलने की चेष्टा में हम अक्सर अपना खुद का विचार बिना बनाये बोलने लगते है! जिससे आपस में भेद मतभेद पैदा हो जाते हैं ! इंडिया मे लोगो को बोलने की जल्दी होती , और पूरा पढ़ने का समय नहीं मिलता। इतिहास गवाह है। आधे से ज्यादा दंगे,मार पीट , बवाल इसी कारण होता है की हमें पूरी बात न पाता होते हुए भी कही भी बोलना,मारना पीटना शुरू करदेते है । एक कार वाले ने साइकिल वाले को टक्कर मारी पूरी भीड़ कार के सीसे के साथ कार चलाने वाले को भी तोड़ देती है । क्युकी ये इंडिया है । भावनाओं में बह जाते है हम । फिर बाद में साइड मे खड़े भाई साहब मामला ख़तम होने के बाद बताते है गलती साइकिल वाले की थी , गलत साइड से साइकिल ले आया था, लेकिन भीड़ का क्या उन्होंने अपना हाथ साफ़ किया और चल दिए,सबको अपना हाथ सफा करना होता है । आपको क्या लगता है रोड पर जब किसी को चोट लगती है तो लोग बचाने क्यों नही जाते ? क्युकी उन्हें पता होता है बचाने जायेगे , दो चार आठ खा के आयेगे, और सबका ऐसा मानना है की भीड़ का कोई रूप नहीं होता ।एक किस्सा है , हमारे गली में एक जुम्मन चाचा रहते है उनका मानसिक संतुलन कहते है ठीक नहीं लेकिन दीन ईमान के पक्के हैं पांच वक़्त की नमाज पढ़ते हैं! एक दिन वो पास के अम्बे माई के मंदिर मे घुस गए दरवाजा खोल के ! एक महापुरुष ने देख लिया! कसम से बता रहा हु । ऐसे जुम्मन चाचा को उनकी सर्ट पकड़ के घसीट के लाये है की ,जुम्मन चाचा बेचारे कांप गए दो चार जुम्मन चाचा को लगा दिए , एक दो सज्जन आये मामला रफा दफा हुआ, वरना उसदिन छोटी सी गली में कर्फ्यू लग ही गया था समझो ,मैं बगल वाली पान की दुकान से घर की पूजा समग्री के लिए साफ सुथरा पान लेने गया था, पान लिया मंदिर में गया ,आज बता रहा हूँ मैं उस समय चप्पल उतारना भूल गया था ,अन्दर पहुच कर जल्दी जल्दी चप्पल को हवाई जहाज के जैसे बहार फेंका, वरना पुजारी जी दादी जी से बता देते तो पान लाने की शाबासी की जगह कुटाई हों जाती हमारी, कोई बात नही है वैसे मैं हिन्दू हूँ ! जुम्मन चाचा की तरह पांच वक़्त का नमाजी आपवित्र नहीं,और हाँ सुबह मैंने नास्ते में अंडा खाया हुआ था । लेकिन मेरा ऐसा मनना है की मंदिर मे जाने लिए मन पवित्र होना चाहिये ,शारीर नहीं।खैर मेरी छोड़िये । मैं मंदिर जाके जुम्मन चाचा का अधूरा कम पूरा किया,हाथ जोड़ा घंटे की डोर बांधी , उसे दो बार बजाया और प्रसाद लिया ,दो बार लिया प्रसाद में लाडू था इसलिए दो बार नही लिया वो  जुम्मन चाचा के लिए भी लेना था ना इसलिए उनके हिस्से का भी लिया ,वो अभी भी मंदिर से दूर खड़े थे । हम वापस आये जुम्मन चाचा को प्रशाद दिया जुम्मन चाचा ने पूछा ठीक से बंधा है न ? मैंने हां में सीर हिलाया। और घरको हो लिया
जैसे हमारी गली में हुआ ठीक वैसे ही
हमारे आस पास हम हमेसा देखते है की मामला सुई के जैसी भी न होती लेकिन पूरी जानकारी के ना होने के आभाव में तलवारे चल जाती है । बाद में ज़मी पर एक रंग बिखरा देख के पता चलता है, ये तो हमने अपनों का ही खून बहा दिया । इसलिए मित्रों पूरी बात सुनिए , आच्छे से सुनिए,अपना विचार बनाइये , फिर मुहँ से खोलिए । शब्दों के तीर चलाये । क्युकी तीर कमान से निकलने के बाद वापस नहीं आते , लेकिन हम सोच समझ के अपना निशाना ठीक से जरुर लगा सकते है । और अगर ऐसा करेगे तो शायद बहुत कम ही तीर चलाना पड़े।

और हाँ इसे पूरा पढ़िये ।

Tuesday, 18 April 2017

इश्क,इबाबत,दुआ,खता सभी मंजिले प्यार की

इतना सारा मेरा किस्सा

ढेर सारी मेरी कहानी

पहले पन्ने से शुरू दास्ताँ

खत्म पहले पन्ने पर कहानी

न तूने जाना , न जाना मैंने

इश्क , इबाबत , दुआ , खता ,सभी मंजिले प्यार की

सब यहीं रखके जा रहा हूँ

सोने पूरी नींद में

आना तो उठा लेना , नहीं जगू तो

तब थोड़ी मिट्टी हाथों में लेकर

होठों से चूमकर ठीक मेरे चैहरे पर गिरा देना

और नमाज़ मे ये बोलना की , तेरी अब जरुरत है
तेरी अबसे कमी होगी

इस ज़मी से उठ और चल ।

ख़ुदा से बात कर रखी है।

लेकिन उसके लिए तुझे आना पड़ेगा ।

आ जाना , वरना हर बात की तरह ये बात भी खाली जाएगी ,

और कौन कहता है कफ़न में जेब नही होती

दांये जेब मे तेरी तशवीर रखी है,

वहां सबको बताना है

मेरा प्यार कैसा दिखता था

जो मेरे आँखों मे सजता था।

सबसे वहां सर्ते वफ़ा लगाऊंगा ,

हारूँगा तो नहीं न .?

Saturday, 15 April 2017

बर्बाद जिंदगी की हक़ीकत

बर्बाद जिंदगी की हक़ीकत,

बस इतनी सी है की मुझे तुमसे इश्क है

इस आधी अधूरी कहानी की हक़ीकत,

बस इतनी सी है की मुझे तुमसे इश्क है

इन फिज़ाओ में घुली तेरी खुसबुओ की हक़ीकत,

बस इतनी सी है की मुझे तुमसे इश्क है

मेरे इन तमाम जुर्म-ए-इश्क की हक़ीकत,

बस इतनी सी है की मुझे तुमसे इश्क है

इन बारिशों की घनघोर घटाव़ो की हक़ीकत

बस इतनी सी है की मुझे तुमसे इश्क है

मेरे सीने पर रखे पत्थऱो की हक़ीकत

बस इतनी सी है की मुझे तुमसे इश्क है।

और आज मेरी टूट रही इस कलम की हक़ीकत,

बस इतनी सी है की मुझे तुमसे इश्क है।

और आज मेरे युहीं सो जाने की हक़ीकत,

भी बस इतनी सी है की मुझे तुससे इश्क था।



Monday, 10 April 2017

माला ले लो


सच तो ये हैं की हम कुछ लिखना ही नहीं चाहते। अरे क्यों लिखे ,घंटों लगते हैं सदियां गुजर जाती है। इतना उलझ जाओ की खुद को अल्फाजों की दुनिया से वापस लाने में कई -कई सदियां गुजर जाती है। और भी काम है हमें,जीना भी है।

तुम्हें क्या पता कहानी कैसे बनती है,माला कैसे बनती है। पैहले एक पहर दिनमे सो कर, रातों को सारे पहर जगना पड़ता है। सुई चुभती हैं हाथो में,सीने में। एक एक शब्द उधार लाते हैं गमो
के बाजार से लाखों की कर्जदारी हो गयी है खुद मेरी। फिरभी जज्बात के मालिक की चार बात सुनो ,उससे हर बार बहस मेरी सिर्फ इस बात पर होती है की उसकी दी हुई जज्बातों की सूत में जब-जब एक-दो-चार पूरे पन्ने की सार तक की कहानी बुनना चाहो तो वह टूट क्यों जाती है। हर बार मजबूत रिश्तों के नाम की सूत थमा देता है , जो बहुत कमजोर साबित होते है कहानी बुनते समय।
दाम के नाम पर दरिया भर आँशू देकर आता हूँ,उसमे भी वफ़ा के साहूकार का हमेसा यही कहना होता है कि आँशूओ में तेरे दर्द की कमी हैं , और नमी भी थोड़ा ऊपर नीचे है।

लेकिन पूरा बाजार जानता है की कैसे मैं सूखी आँखों से एक-एक गमों के मोती चुन-चुन कर लाता हूँ, सीने से लगाकर उसकी आंशूओ की खनक सुनता हूँ।

आजकल बाजार भी बड़ा मंदा है,और खरीददारों को माला तुरंत चाहिये ,डूबने के उतावले होते है सब। वो एक-एक मोती देखके अपने गम के नज़ारिए से लेते है। कोई मोती पसंद ना आये तो पूरी माला खुलवा कर,रुला कर मोती बदलवा देते है। फिर दूसरे मोती में फिरसे दर्द की नयी खनक भरो

दाम के नाम पर वाह वाह करके चले जाते है, ये धंधा घाटे का हो चला है।
नुकसान की परवाह तो हम माला बनाते समय करते ही नहीं,लेकिन जब जमा पूंजी के नाम पर शुकून भी नही मिलता तो बड़ा ठगा-ठगा सा महसूस होता है।
कोई सरकारी छुट्टी की गुंजाईश भी नहीं इस कारोबार में,नींदो में भी दुसरो के सपनो को जीते रहते है।

जबदस्त होड़ मची है बुनाई क्र कारखाने में, सब एक-दूसरे की कारीगिरी को पीछे छोड़ना चाहते है, सब नए-नए दर्द,मोती ढूढ़ कर ला रहे है।
लेकिन सब मोती खरीद कर लाते उसी बाजार से है,वहा बाजार के साहूकार के पास सबके बही खाते है।
बड़े कर्ज़दारो में गुलज़ार,साहिर और अख्तर साहब का नाम सबसे ऊपर है।
बड़े मोतियों के खरीददार है ये सब,साहिर साहब का खाता बंद करदिया गया है, लेकिन बाजारों में उनकी खोज होती रहती है, तफ्तीश तब तेज हो जाती है जब उनकी माला के मोती इधर उधर कही बिखरे मिलते है।

कल साहूकार चौराहे पर खड़ा होकर चिल्ला रहा था,भले ही साहिर कर्ज़दार थे लेकिन कीमत हर मोती की वो सही लगाते थे। तुम नौसेखियों की तरह नहीं थे वो । मेरा क़र्ज़ भी बढ़ता चला जा रहा है, कल ही साहूकार के आदमी आये थे हिसाब मांगने मैंने भी हुनर दिखाया अपनी कलम का ।
नयी-नयी चमचमाती माला थमा दी, पूरी गली,मेरी गली से रोते हुए गए है।

चलो जाओ सब धंधा करने दो मुझे।
माला ले लो
भाई माला ले लो

नए दर्द नए शब्द से बुने हुए है,नयी-नयी हसरते नयी-नयी चहतो से बुने हुए है।
बाबू जी एकबार देखिये तो, पढ़िए तो एकदम नया है, पूरे बाजार से अलग है ये माला।

Friday, 7 April 2017

तेरे होठों से जब होंठ तेरे टकरा जाते होगे।

तेरे होठों से जब होठ तेरे टकरा जाते होगे

तब हवाएं चलने लगती होगी रूहानी

और सुनामी भी रेगिस्तान बन जाते होगे

लाखों दिल भरते होगे आहें आज भी

जब हवाओं में तेरी सांसो की खुशबू घुल जाती होगी

की जी उठ खड़े होते होगे मुर्दे भी अपनी कब्र से
जब हवा उन तक वो पहुंचती होगी।

ज़रे-ज़रे कतरे-कतरे ने तारीफ की है
तेरे हुस्न की

सबने मिलके ख़ुदा से बगावत की होगी

सजाओ में मौत मिल रही होगी सबको वहा इश्क की अदालत मे

सब वफ़ा को घेरे होगे
प्यार के कठघरे में

बेवफ़ाई के पास दलीले और झूटे वादों की पेशकस होगी

और वहां वफ़ा आज भी चुपचाप खड़ा होके सुन रहा होगा सबकुछ

जीत गया होगा मुक़दमा एकबार फिरसे झूटा इश्क,
फ़रेबो से , मक्कारों से अपने

लेकिन इश्क की आज भी एक अलग  मुसकान होगी ।

गुलाब...

उन्होंने कहा, पूरे अमीनाबाद के लड़के हमपर मरते हैं तुम मानो न मानो वो हमसे बे-पनाह मोहब्ब्त करते हैं और अगर दराख से झुमका भी दिखा दूं तो ...