Sunday, 23 April 2017

ऐसा भी कुछ इंतजाम करे ।

तमिलनाडू- 34000
आंध्र प्रदेश-43000
कर्नाटका-34000
केरला-28000
कोचीन,के आस पास-1800
साऊथ इंडिया-108000
महाराष्ट्र-4500-0
मथुरा वृंदावन-5000
हिमाचल प्रदेश-2000

सरकारी लिस्ट में-  के अनुसार ये सख्या हैं हमारे यहाँ मंदिरों और तीर्थ धामों की ।
300000 से ज्यादा की संख्या में मस्जिद भी है हिंदुस्तान में। हिंदुस्तान में मंदिर मस्जिद की संख्या आप गिन नहीं सकते क्युकी ये नामुमकिन के बराबर है,वो इसलिए क्युकी यहाँ हर घरके आंगन में तुलसी मैया और घर के किसी कोने में मंदिर है । और नमाज के लिए चबूतरा हैं । इसीलिए गिनती करना कठिन है । और एक सर्वे के मुताबिक हिंदुस्तान मे हम जहा भी है उसके 7 किलोमीटर के आस पास मंदिर है
हम हिंदुस्तान में बाकि सभी चीजों की गिनती कर सकते है ,जैसे इंसान , हम अपने आप को गिन सकते है , हम अपने घर अपने शहर गिन को सकते है । जैसे -
हिंदुस्तान मे कुल -108000 गाँव तय और  बाकि की गिनती चल रही है ।
क़स्बे-638000 के आस पास है
बड़े शहरों मैं हमारे पास 400 शहर है।
हमारे यहा अस्पताल सरकारी -35416 से 59332 के आस पास है । जिनमे डॉक्टर की संख्या मात्र 2% है गर्व की बात है या शर्म की नहीं कह सकते
निजी बड़े अस्पतालों में -16000 के आस पास
और हाँ हिंदुस्तान में स्कूल,कॉलेज भी गिनती की जा सकती है।
नाम के बारबार हैं अध्यापक भी जो ना काम के बराबर है
अब बात पर आते है। एक परमात्मा को पूजने के लिए हमने कितने मंदिर मस्जिद बना डाले,या यु कहे की हमने भगवांन के आड़े खुद को ही बाँट डाले,
और इतने मंदिर मस्जिद होने के बावजूद अभी भी हम एक और मंदिर मस्जिद के लिए लड़ रहे है। कश्मीर के चंद टुकड़ो के लिए देश विदेश के दौरे कर रहे है। बहार से देश को सुरक्षित और क्या अन्दर से हम उसे खोकला नहीं कर रहे है। हमारी मीडिया तो धन्य है। वो सोनू निगम ,और मंत्रियो के बयान में इतना उलझ जाता है की उसे देश के और मुद्दों का पता ही नही चलता, या यु कहे हमें जो चीज़ देखने में मजा आता है वो वही दिखाते है।

देश का किसान अपना मूत्र पी रहा
गर्व से कहो हम कृषि प्रधान देश है,

देश की महिलओं को बीच बाजार नंगा किया जाता है,उनके मुहँ में तेजाब घोला जाता है,
गर्व से कहो हम पुरुष प्रधान देश है।

देश का नौजवान पढ़ाई के बाद नौकरी न पाने पर अपनी जान दे रहा,
गर्व से कहो हम युवा शक्ति का देश है।

हिंदू-मुस्लिम मंदिर-मस्जिद के लिए लड़ रहे,
गर्व से कहो हम सब एकता के भेष में हैं।

पढ़ा लिखा नौजवान बाजार में जूते सी रहा , और अगूठा छाप देश का भविष्य बना रहे,
गर्व से कहो हम कल की नयी सोच हैं ।

रहने को छत नही,खाने को खाना नहीं , और पहनने को कपड़े नहीं,
गर्व से कहो हम एक साथ दस मिसाइल आकाश में छोड़ने की होड़ में है।

किसान कर्ज मे डूबा मरता जा रहा,
गर्व से कहो फिर भी हम दुसरे देश से उधार लेके बुलेट ट्रेन को चुनावी मुद्दा बनाने के जोश में है।

100 रूपये की खातिर यहा हम एक दुसरे को मार रहे ,
गर्व से कहो हम शांति प्रिय महोदय हैं।

अब एक लाइन मेरी कलम के लिए भी ।
कागजों पर लिखने वाले जेल में और हर चुनाव में हमको टोपी पहनाने वाले इसी देश के पार्लियामेंट में है।

देश को बहार से बचाने से क्या फायेदा जब अन्दर ही अंदर ये खोकला होता जा रहा है , सरकारे आएगी जाएगी , लोग बदल जायेगे । लेकिन अगर थोड़ा थोड़ा हम खुद को बदल ले यार तो सच में ये देश बदल जायेगा।

चलो छोड़ो यार मंदिर मस्जिद की बाते
चलो कुछ काम करे ,तुम अपने घरको अयोध्या बनाओ,मैं अपने घर को मदिना बनाऊ , ऐसा भी कुछ इंतजाम करे ।
और इस ज़मी को पहले जितना पाक़ बना दे की ख़ुद ख़ुदा निचे आकर हमारी बात करे।

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