Tuesday, 18 April 2017

इश्क,इबाबत,दुआ,खता सभी मंजिले प्यार की

इतना सारा मेरा किस्सा

ढेर सारी मेरी कहानी

पहले पन्ने से शुरू दास्ताँ

खत्म पहले पन्ने पर कहानी

न तूने जाना , न जाना मैंने

इश्क , इबाबत , दुआ , खता ,सभी मंजिले प्यार की

सब यहीं रखके जा रहा हूँ

सोने पूरी नींद में

आना तो उठा लेना , नहीं जगू तो

तब थोड़ी मिट्टी हाथों में लेकर

होठों से चूमकर ठीक मेरे चैहरे पर गिरा देना

और नमाज़ मे ये बोलना की , तेरी अब जरुरत है
तेरी अबसे कमी होगी

इस ज़मी से उठ और चल ।

ख़ुदा से बात कर रखी है।

लेकिन उसके लिए तुझे आना पड़ेगा ।

आ जाना , वरना हर बात की तरह ये बात भी खाली जाएगी ,

और कौन कहता है कफ़न में जेब नही होती

दांये जेब मे तेरी तशवीर रखी है,

वहां सबको बताना है

मेरा प्यार कैसा दिखता था

जो मेरे आँखों मे सजता था।

सबसे वहां सर्ते वफ़ा लगाऊंगा ,

हारूँगा तो नहीं न .?

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