Friday, 28 April 2017

मैं एक सिपाही हूं...

मैं एक सिपाही हूं।

मैं वहां दूर रेगिस्तान की धूल खाता हूं ,
ताकि तुम तक अच्छी हवा पहुचं सके ।

मैं वहां -50 डिग्री के निचे बर्फ में जगता हूं ,
ताकि तुम रजाई के अन्दर के  आराम से सो सको।

मैं वहां उन ऊची ऊची पहाड़ियों पर सोता हूं,
ताकि तुम्हें तुम्हारा घर मिल सके।

मैं वहां गोलियों से दिवाली और खून से होली खेलता हूं,
ताकि तुम अपने बच्चो के साथ होली दिवाली मना सको

मेरी माँ मेरे बच्चे मेरा साल भर इंतजार करते है,
ताकि तुम घर जाकर अपने अपनों से मिल सको

मैं वहां सीधे सीने पर 10-10 गोलिया खाता हूं,
ताकि तुम्हे यहा एक खरोच भी ना आ सके

मेरी पत्नी अगली सुबह बेवा हो जाती है,
ताकि तुम्हारी पत्नी के मांग में सिंदूर हर शुबह सजता रहे।

मैं वहां सुखी रुखी रोटिया खाता हूं,पानी पिघला के पीता हूं,
ताकि तुम आपने माँ के हाथ की रोटिया खा सको

और तुम यहाँ मुझे फिर भी बलात्कारी, घूसखोर, हैवान बोलते हो मेरी वर्दी को तार तार करते हो

और देखो फिर भी मैं चुपचाप शरहद पर खड़ा, तुम्हारी रक्षा करता रहा हूँ । तुम्हारी एक मुस्कान पर आपनी ज़ा नावछावर कर रहा हूँ।

मैं यहाँ से हाथ में लोहे का बक्शा लेकर जाता हूँ
उधर से मैं लकड़ी के बक्से में आ जाता हूँ।

फिर भी खुस हूँ फिर भी मेरा परिवार आबाद हैं फ़ख्र हैं की मेरा देश आजाद हैं ।
क्युकी में मरने के बाद इन्सान नही ,शहीद कहलाता हूँ  । क्युकी मैं एक सिपाही हूं ।
और यही मेरी पहचान हैं
मेरा देश ही मेरी शान हैं।
ये मेरा हम सबका हिंदुस्तान हैं।

जय हिन्द

#dadicated_to_indian_Army_

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