Friday, 28 April 2017

स्याही कलम की...

तेरी जुल्फों की मशहूरआंधियो ने मेरी
चाहतों के पन्नो पर इश्क की रूहानी स्याही गिरा दी थी,
लाज़मी था उसके बाद पन्नो पर चाहत का बिख़र जाना,
फिर मैंने खुद को और अपनी कलम को संभाला
और लिखने लगा,आबाद-ए-इश्क की
बर्बाद कहानियां,
क्या कहे तेरी जुल्फों का कुसूर था या था कुसूर मेरी नजरो का ,
लेकिन हां अब ,

दर्द मेरे दिल मे हैं
और स्याही मेरी कलम की लाल है।

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