तेरे होठों से जब होठ तेरे टकरा जाते होगे
तब हवाएं चलने लगती होगी रूहानी
और सुनामी भी रेगिस्तान बन जाते होगे
लाखों दिल भरते होगे आहें आज भी
जब हवाओं में तेरी सांसो की खुशबू घुल जाती होगी
की जी उठ खड़े होते होगे मुर्दे भी अपनी कब्र से
जब हवा उन तक वो पहुंचती होगी।
ज़रे-ज़रे कतरे-कतरे ने तारीफ की है
तेरे हुस्न की
सबने मिलके ख़ुदा से बगावत की होगी
सजाओ में मौत मिल रही होगी सबको वहा इश्क की अदालत मे
सब वफ़ा को घेरे होगे
प्यार के कठघरे में
बेवफ़ाई के पास दलीले और झूटे वादों की पेशकस होगी
और वहां वफ़ा आज भी चुपचाप खड़ा होके सुन रहा होगा सबकुछ
जीत गया होगा मुक़दमा एकबार फिरसे झूटा इश्क,
फ़रेबो से , मक्कारों से अपने
लेकिन इश्क की आज भी एक अलग मुसकान होगी ।
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