Wednesday, 26 April 2017

पत्र

पत्र ।

बचपन की किलकारी में,
आँगन की फुलवारी में,
पालने के झूलों में,
माटी के सड़को में,

मैं जब-जब हँसा,
मैं जब-जब खेला,
मैं जब-जब झूला,
मैं जब-जब गिरा,

माँ तू साथ थी
माँ तू साथ थी
हाँ माँ तू साथ थी।

मेले की भीड़ में,
खट्टे सपनों के मेल में,
भूतो की कहानी में,
घर के हर कोने में,

मैं जब-जब खोया,
मैं जब-जब जगा,
मैं जब-जब डरा,
में जब-जब छिपा,

माँ तू साथ थी
माँ तू साथ थी
हाँ माँ तू साथ थी।

बरसात की रातों में,
ठण्ड रातों की छाव में,
गर्मी की उमस में,
गरजते बादलों की धमक में,

मैं जब-जब भीगा,
मैं जब-जब ठिठुरा,
मैं जब-जब तिलमिलाया,
मैं जब-जब सहमा,

माँ तू साथ थी
माँ तू साथ थी
हाँ माँ तू साथ थी।

साईकल की पहली दौड़ में,
बुख़ार से तपते बदन में,
उड़ चिड़िया उड़ मैना के खेल में,
मस्ती वाली छुक-छुक रेल में,

मैं जब-जब चोट खाया,
मैं जब-जब तड़पा,
मैं जब-जब पकड़ा गया,
मैं जब-जब गिरा,

माँ तू साथ थी
माँ तू साथ थी
हाँ माँ तू साथ थी।

पाठशाला की पहली क्लास में,
पापा की पहली डांट में,
परीक्षा से पहली वाली रात में,
झूठे समाज के अभिमान में,

मैं जब-जब डगमगाया,
मैं जब-जब रोया,
मैं जब-जब घबराया,
मैं जब-जब लड़ा,

माँ तू साथ थी
माँ तू साथ थी
हाँ माँ तू साथ थी।

मेरे तब में,
मेरे अब में,
मेरे सब में,
और मेरे आने वाले कल में,

जैसे तू साथ थी,
जैसे तू साथ है,
जैसे तेरा साथ है,
जैसे तेरा साथ रहेगा,

मेरा भी वादा हैं तुझसे माँ।

तेरी झुकती कमर में,
तेरे लड़खड़ाते कदम में,
तेरी सफ़ेद मुस्कान में,
तेरे बुढ़ापे की छाव में,

तेरा सहारा बनूगां,
तेरे कदम बनूगां,
तेरा चैहरा बनूगां,
तेरी सुबह बनूगां,

तेरा बेटा हूँ मैं माँ
तेरा बेटा हूँ मैं माँ ।
तेरा ही बेटा हूँ मैं माँ

No comments:

Post a Comment

गुलाब...

उन्होंने कहा, पूरे अमीनाबाद के लड़के हमपर मरते हैं तुम मानो न मानो वो हमसे बे-पनाह मोहब्ब्त करते हैं और अगर दराख से झुमका भी दिखा दूं तो ...